निरीक्षण में खुली स्वास्थ्य विभाग की हकीकत, सवालों से घिरीं एडी हेल्थ
एडी हेल्थ डॉ. सीमा अग्रवाल के जिला अस्पताल और महिला अस्पताल निरीक्षण के दौरान कर्मचारियों के वेतन, मरीजों की समस्याओं और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई मुद्दे सामने आए।
• एडी हेल्थ के निरीक्षण में अस्पतालों की कई व्यवस्थागत खामियां सामने आईं।
• आउटसोर्स कर्मचारियों ने 11 माह से वेतन न मिलने का आरोप लगाया।
• अल्ट्रासाउंड की लंबी प्रतीक्षा अवधि को लेकर मरीजों की शिकायतें उठीं।
जन माध्यम
बरेली। स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं की हकीकत उस समय खुलकर सामने आ गई जब एडी हेल्थ डॉ. सीमा अग्रवाल ने जिला अस्पताल और महिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मरीजों की समस्याओं से लेकर कर्मचारियों की शिकायतों तक कई गंभीर मुद्दे सामने आए, लेकिन कई सवालों पर एडी हेल्थ जवाब देने से बचती नजर आईं।
महिला अस्पताल में मिली खामियों पर उन्होंने सीएमएस को व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए। वहीं अस्पताल में तैनात एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर मरीजों और तीमारदारों से अभद्रता करने के आरोप भी सामने आए। चपरासी द्वारा बाबू का कार्य किए जाने के सवाल पर भी डॉ. सीमा अग्रवाल ने अनभिज्ञता जताते हुए कहा, "जानकारी नहीं है, दिखवाती हूं।"

निरीक्षण के दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों ने भी अपना दर्द बयां किया। उनका आरोप था कि उन्हें पिछले 11 महीनों से वेतन नहीं मिला है। आउटसोर्स महिला कर्मचारी शशि यादव ने आरोप लगाया कि वेतन मांगने पर डॉ. शशि सक्सेना ने उनके साथ धक्का-मुक्की की। इस गंभीर आरोप पर भी एडी हेल्थ ने मामले की जानकारी न होने की बात कही।
सबसे अहम सवाल तब उठा जब पत्रकारों ने जिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड केंद्र पर मरीजों को कई-कई सप्ताह और महीनों बाद की तारीख मिलने की शिकायत उठाई। इस सवाल पर एडी हेल्थ डॉ. सीमा अग्रवाल असहज नजर आईं। उन्होंने स्पष्ट जवाब देने के बजाय सिर्फ इतना कहा कि मामले को दिखवाया जाएगा। मरीजों का कहना है कि समय पर अल्ट्रासाउंड न होने से इलाज प्रभावित होता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ठोस जवाब देने से बचते दिख रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान एडी हेल्थ ने अस्पताल की अनियमितताओं पर नाराजगी भी जताई और माना कि कई जगह व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत है। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि जब निरीक्षण के दौरान ही इतने गंभीर मामले सामने आ रहे हैं, तो रोजमर्रा में अस्पतालों की निगरानी आखिर कैसे हो रही है? स्वास्थ्य विभाग के दावे और जमीनी हकीकत के बीच का यह फासला अब लगातार सवाल खड़े कर रहा है।