रफी साहब की याद में बहेड़ी की फिजा में गूंजे अमर तराने
बहेड़ी में मोहम्मद रफी की 46वीं पुण्यतिथि पर मोहम्मद हसनैन ने चार दशक पुरानी परंपरा निभाते हुए रिक्शे पर साउंड सिस्टम लगाकर पूरे नगर में रफी के सदाबहार गीत सुनाए।
46वीं पुण्यतिथि पर बहेड़ी में मोहम्मद रफी को अनोखी संगीतमय श्रद्धांजलि।
मोहम्मद हसनैन करीब 40 वर्षों से लगातार निभा रहे हैं यह परंपरा।
नगर की गलियों में गूंजे रफी के अमर गीत, लोगों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
जन माध्यम
बहेड़ी/बरेली। महान पार्श्व गायक मोहम्मद रफी की 46वीं पुण्यतिथि पर बहेड़ी एक बार फिर उनके अमर गीतों से सराबोर हो उठा। मोहल्ला शाहजी नगर निवासी एनाउंसर मोहम्मद हसनैन ने हर वर्ष की तरह इस बार भी रिक्शे पर साउंड सिस्टम और रफी साहब का चित्र सजाकर नगर की प्रमुख सड़कों, बाजारों और गलियों का भ्रमण किया। इस दौरान रफी के सदाबहार नगमों ने पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया।
मोहम्मद हसनैन पिछले करीब 40 वर्षों से 31 जुलाई को यह अनूठी परंपरा निभा रहे हैं। उनका कहना है कि इस दिन वह अपना अन्य कार्य छोड़कर पूरी तरह रफी साहब की स्मृतियों को समर्पित कर देते हैं। नगर भ्रमण के दौरान ‘न फनकार तुझसा तेरे बाद आया...’, ‘बड़ी दूर से आए हैं प्यार का तोहफा लाए हैं’, ‘न तू ज़मीं के लिए, न आसमां के लिए’ और ‘तुम मुझे यूं भुला न पाओगे’ जैसे कालजयी गीत लगातार गूंजते रहे।
गीतों की मधुर धुन सुनकर जगह-जगह लोग ठहर गए और कई लोगों ने मोहम्मद रफी को श्रद्धासुमन अर्पित किए। हसनैन ने बताया कि उन्होंने रफी साहब को कभी देखा नहीं, लेकिन उनकी आवाज और गायकी से ऐसा आत्मीय जुड़ाव है कि हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर यह आयोजन करना अपना सौभाग्य मानते हैं।
उन्होंने कहा कि रफी साहब की गायकी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है और नई पीढ़ी तक उनकी संगीत विरासत पहुंचाना ही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि है। बहेड़ी में यह अनूठी पहल अब हर वर्ष लोगों के इंतजार का हिस्सा बन चुकी है।