रसूख की दीवारें ढहीं… 

बरेली में बीडीए का बुलडोजर एक्शन! मौलाना तौकीर रज़ा के करीबी कालोनाइज़र मोहम्मद आरिफ का तीन मंजिला अवैध शोरूम 6 घंटे की जद्दोजहद के बाद ढहाया गया। अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई जारी।

रसूख की दीवारें ढहीं… 
HIGHLIGHTS:

➡️ रसूख की दीवारें ढहीं!
➡️ 3 मंजिला आलीशान शोरूम 6 घंटे में मलबे में तब्दील
➡️ तौकीर रज़ा के करीबी कालोनाइज़र को झटका
➡️ जगतपुर की 16 अवैध दुकानें भी हुईं ज़मींदोज
➡️ बीडीए का संदेश: अब किसी की बारी बाकी नहीं
➡️ अवैध साम्राज्य का अंत, कानून की जीत

छह घंटे की जद्दोजहद में भराभराकर गिरा तीन मंजिला अवैध शोरूम

जन माध्यम 
बरेली।
कभी रौब,रसूख और शान का प्रतीक रहा मोहम्मद आरिफ का आलीशान तीन मंजिला शोरूम रविवार को उस वक्त धूल में बदल गया, जब बीडीए की भारी-भरकम मशीनों ने आखिरी प्रहार किया। 26 सितंबर के  बवाल में आरोपी मौलाना तौकीर रज़ा के करीबी माने जाने वाले कॉलोनाइजर आरिफ की यह इमारत वर्षों से कानून को चुनौती देती खड़ी थी पर अंत न्याय, समय और प्रशासन की जद्दोजहद के आगे इसे झुकना पड़ा।
शनिवार की दोपहर शुरू हुई पहली मुहिम में तीन बुलडोज़र और पोकलेन मशीनें छह घंटे तक जूझती रहीं, लेकिन इमारत अपनी कठोर दीवारों और स्टील के विशाल ढांचे के सहारे अड़ी रही। मजदूर हथौड़े चलाते रहे, चिंगारियाँ उड़ती रहीं, मशीनें गरजती रहीं पर शोरूम का एक-एक स्तंभ जैसे कह रहा था कि उसने ताकत और अकड़ दोनों को ऊपर-ऊपर से ओढ़ रखा है। लेकिन कानून का हाथ देर से चलता है, कमजोर नहीं पड़ता।रविवार सुबह 11 बजे बीडीए की टीम फिर मौके पर पहुँची इस बार और भी सख़्त इरादों के साथ। सड़क पर हलचल थी, लोग दूर खड़े होकर यह देखने पहुँचे थे कि आखिर रसूख की यह दीवार कब ढहेगी। बुलडोज़र जब दोबारा गड़गड़ाते हुए आगे बढ़े तो धूप, धूल और आवाज़ों के बीच एक माहौल ऐसा बना जैसे न्याय अपने कदमों से ज़मीन नाप रहा हो।
पोकलेन मशीन का फावड़ा दीवारों को चीरता रहा, एक-एक कर स्तंभ टूटते गए… और फिर शाम साढ़े पाँच बजे वह पल आया जिसका इंतज़ार था।शोरूम की विशाल इमारत थरथराई, चरमराई… और भारी गर्जना के साथ भराभराकर ढह गई। धूल का घना बादल ऊपर उठा, सड़क पर खामोशी पसर गई, लोगों ने दूर खड़े होकर इस दृश्य को देखा जैसे कोई साम्राज्य आखिरकार खत्म हुआ हो।यह वही शोरूम था जो बिना नक्शा पास कराए बनाया गया था। 2024 में मिले नोटिस को आरिफ ने हमेशा की तरह अनदेखा कर दिया। लेकिन रविवार की शाम तक वह पूरा ढांचा सिर्फ बता रहा था कानून को हल्के में लेने की कीमत हमेशा महंगी पड़ती है।उधर, जगतपुर की अवैध मार्केट भी शनिवार को ही ढहा दी गई थी। आरिफ की 16 दुकानें पलभर में मलबे में तब्दील हो गईं। बरातघर की दीवारें भी हथौड़ों से टूटती चली गईं। बीडीए के अधिकारियों का साफ संदेश है,अवैध निर्माण पर अब कोई ढील नहीं। चाहे कितना भी रसूख क्यों न हो, नियमों को ठेंगा दिखाने वालों पर यही कार्रवाई जारी रहेगी। यह सिर्फ एक इमारत का गिरना नहीं था यह उन तमाम अवैध साम्राज्यों के लिए चेतावनी थी,
जो कानून को अपनी जेब में समझकर खड़े किए गए थे।
और अब…शहर जानना चाहता है अगली बारी किसकी?