चार दिन बाद ध्रुव फिर उड़ा
मीरगंज (बरेली) में सरसों के खेत में इमरजेंसी लैंडिंग के बाद ध्रुव हेलीकॉप्टर 4 दिन बाद फिर उड़ा! दिन-रात मरम्मत, पायलटों की सूझबूझ से बचीं 3 जानें।
➡️ मीरगंज (बरेली): सरसों के खेत में ध्रुव हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग
➡️ तकनीकी खराबी, पायलटों की सूझबूझ से 3 क्रू मेंबर्स पूरी तरह सुरक्षित
➡️ खेत बना अस्थायी एयरबेस: इंदौर-बेंगलुरु से पहुंचीं स्पेशल टीम
➡️ 4 दिन-रात बिना रुके मरम्मत, गुरुवार दोपहर फिर भरी उड़ान
➡️ गांव में मेला सा लगा, लोग पहली बार इतने करीब से देखा ध्रुव
➡️ वायुसेना बयान: हेलीकॉप्टर पूरी तरह सुरक्षित, अब फिर ड्यूटी पर
➡️ ग्रामीणों ने कहा: जय हिंद! हमारे जवान सलामत रहें
तकनीकी खराबी से हुई इमरजेंसी लैंडिंग दिन-रात मेहनत के बाद फिर आसमान में गूंजा
जन माध्यम
मीरगंज।बरेली। मीरगंज क्षेत्र के गोरा लोकनाथपुर गांव की शांत दोपहरें उस समय थम-सी गईं, जब सोमवार शाम हवा को चीरते हुए उड़ रहा ध्रुव हेलीकॉप्टर अचानक सरसों के खेत में उतर आया। यह क्षण किसी रोमांचक दृश्य से कम नहीं था गांव की मिट्टी, सरसों की महक और उसके बीच खड़ा ध्रुव… ग्रामीणों की धड़कनें तेज थीं, नज़रों में चिंता भी थी और एक अजीब सी श्रद्धा भी।
पर गुरुवार दोपहर जब वही हेलीकॉप्टर फिर से अपने पंख फैलाते हुए आसमान में उठा, गांव की हवा में राहत, गर्व और खुशी एक साथ महसूस हुई। यह सिर्फ उड़ान नहीं थी यह जीत थी साहस की, तकनीक की और हमारी वायुसेना की अटूट निष्ठा की।
सोमवार को उड़ान के दौरान अचानक तकनीकी दिक्कत आई।
यह वह क्षण था, जब एक पायलट का अनुभव और विवेक किसी भी बड़ी आपदा को मात दे सकता है और हुआ भी यही।ध्रुव को सरसों के खेत में बिल्कुल सुरक्षित उतारा गया।हेलीकॉप्टर में पायलट, सह-पायलट और एक क्रू सदस्य सवार थे।तीनों सुरक्षित रहे।
उनकी सूझबूझ ने साबित कर दिया कि प्रशिक्षण केवल धातु के पंख नहीं संभालता, बल्कि ज़िंदगी की नाज़ुक डोर भी थाम लेता है।
ध्रुव को बचाने और उसकी खराबी दूर करने के लिए वायुसेना ने खेत में ही अस्थायी तकनीकी केंद्र बना दिया।टेंट, रोशनी, साजो-सामान, इंजीनियरों की टीमें सरसों के खेत में जैसे एक छोटा-सा एयरबेस खड़ा हो गया था।इंदौर और बेंगलुरु से विशेषज्ञ टीमें पहुंचीं।
सोमवार से बुधवार की पूरी रातें बिना थके जांच, परीक्षण और मरम्मत चलती रही।गुरुवार सुबह वह क्षण आया, जब तकनीकी दिक्कत दूर हो गई।
दोपहर होते-होते ध्रुव फिर से आसमान में गूंज उठा मानो कह रहा हो,मैं वापस तैयार हूं… मेरे पंख फिर मज़बूत हैं।गांव में ऐसा दृश्य शायद ही पहले कभी देखा गया हो।
हर उम्र के लोग दूर से झांकते, बच्चे उत्साहित, बुजुर्ग निहारते…लोग कहते उड़ते देखा था, पर इतना पास कभी नहीं। ये तो जैसे किसी फिल्म का दृश्य लग रहा है।पुलिस और वायुसेना के जवान लगातार डटे रहे।
भीड़ को काबू में रखा गया ताकि तकनीकी दल का काम बाधित न हो।स्थानीय प्रशासन ने भी पूरी मुस्तैदी से सहयोग दिया।
रक्षा प्रवक्ता शांतनु प्रताप सिंह ने बताया था कि तकनीकी दिक्कत आते ही तुरंत सुरक्षित लैंडिंग की गई।हेलीकॉप्टर पूरी तरह सुरक्षित था और क्रू भी सकुशल।
चार दिनों की मेहनत के बाद हेलीकॉप्टर पूरी तरह सही पाया गया और उड़ान भर सका।ध्रुव हेलीकॉप्टर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की देन है देश की आत्मनिर्भरता की उड़ान।
देश की रक्षा में यह हेलीकॉप्टर किसी सिपाही की तरह डटा रहता है।गुरुवार दोपहर ध्रुव जैसे ही खेत से उठा और गांव की सरहदों के ऊपर उड़ता गया, ग्रामीणों ने दबी आवाज़ में वही शब्द दोहराए जय हिन्द… हमारे जवान सलामत रहें, आसमान हमेशा उनके लिए साफ रहे।