फसल का दाम नहीं तो आंदोलन होगा

बरेली में भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के नेतृत्व में किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और फसलों का उचित मूल्य व सरकारी खरीद समय पर शुरू कराने की मांग की।

फसल का दाम नहीं तो आंदोलन होगा
HIGHLIGHTS:

किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर किया प्रदर्शन।

फसलों का उचित मूल्य दिलाने की उठाई मांग।

खेती की बढ़ती लागत पर जताई चिंता।

जन माध्यम

बरेली। खेतों में दिन-रात पसीना बहाने वाले किसानों की पीड़ा सोमवार को एक बार फिर सड़कों पर दिखाई दी। अपनी मेहनत की फसल का उचित मूल्य न मिलने और बढ़ती खेती लागत से परेशान किसान बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन कर प्रशासन को अपनी समस्याओं से अवगत कराया। किसानों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं भी मौजूद रहीं, जिनकी आंखों में अपनी मेहनत की कमाई के लिए चिंता साफ झलक रही थी।

किसान यूनियन के नेतृत्व में जुटे किसान

भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के मंडल अध्यक्ष रणवीर सिंह फौजी के नेतृत्व में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। किसानों का कहना था कि खेतों में कड़ी मेहनत करने के बावजूद उन्हें उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल पा रहा है, जिससे खेती करना दिन-ब-दिन कठिन होता जा रहा है।

बढ़ती लागत ने बढ़ाई मुश्किलें

किसानों ने बताया कि खेती में इस्तेमाल होने वाली खाद, बीज और दवाइयों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे खेती की लागत तो बढ़ती जा रही है, लेकिन बाजार में फसलों का मूल्य उसी हिसाब से नहीं मिल रहा। ऐसे में किसान आर्थिक संकट से जूझने को मजबूर हैं।

समय पर नहीं शुरू होती सरकारी खरीद

प्रदर्शन कर रहे किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कई जगहों पर सरकारी खरीद समय पर शुरू नहीं होती। इसके कारण किसानों को मजबूरी में अपनी फसल कम कीमत पर व्यापारियों को बेचनी पड़ती है। इससे उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल पाता और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

आवारा पशुओं से फसलों को नुकसान

किसानों ने बताया कि आवारा पशु भी खेती के लिए बड़ी समस्या बन चुके हैं। रात-रात भर खेतों की रखवाली करने के बावजूद पशु फसलों को नुकसान पहुंचा देते हैं, जिससे महीनों की मेहनत एक ही रात में बर्बाद हो जाती है।

जल्द समाधान की मांग

प्रदर्शन में शामिल किसानों और महिलाओं ने प्रशासन से मांग की कि फसलों का उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाए, सरकारी खरीद समय पर शुरू कराई जाए और आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था की जाए।

किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो आने वाले समय में वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।