धर्म बदलकर मौलाना बना हत्यारोपी प्रदीप
1989 में पैरोल जंप करने वाला हत्यारा प्रदीप सक्सेना धर्म बदलकर अब्दुल रहीम बन मुरादाबाद में ड्राइवर बनकर छिपा था, हाईकोर्ट की सख्ती पर बरेली पुलिस ने गिरफ्तार किया।
➡️ हत्यारा प्रदीप सक्सेना 35 साल बाद पकड़ा गया
➡️ धर्म बदलकर बना अब्दुल रहीम, मुरादाबाद में ड्राइवर
➡️ 1989 में पैरोल पर आया, फिर गायब
➡️ हाईकोर्ट की सख्ती, SSP अनुराग आर्य की टीम ने दबोचा
➡️ शाही से गायब, मुरादाबाद करूला में नई ज़िंदगी
➡️ नाम-धर्म-शहर सब बदलकर भी कानून से नहीं बचा
धर्म बदलकर अब्दुल रहीम बना कर रहा था नई ज़िंदगी हाईकोर्ट की सख्ती पर खुला राज
जन माध्यम
बरेली। लगभग तीन दशक तक अदालत और पुलिस को चकमा देकर फरार जिंदगी जी रहा हत्या का वारंटी आखिरकार बरेली पुलिस के शिकंजे में आ ही गया। कभी प्रदीप कुमार सक्सेना, जो हत्या 302 और चोरी 379 जैसे गंभीर मुकदमों में वांछित था, पहचान मिटाने के लिए धर्म बदलकर अब्दुल रहीम बन गया था और मुरादाबाद में सक्सेना ड्राइवर के नाम से पूरी नई दुनिया बसा ली थी। लेकिन हाईकोर्ट की सख्ती ने उसके 30–35 वर्षों का खेल खत्म कर दिया। हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर को चार सप्ताह के भीतर हर हाल में गिरफ्तारी का आदेश दिया था। आदेश मिलते ही एसएसपी अनुराग आर्य ने पूरे अभियान की कमान संभाली और सीओ नगर प्रथम आशुतोष शिवम के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की। टीम ने सबसे पहले प्रदीप के पैतृक कस्बा शाही में तलाश शुरू की, जहाँ लोगों ने बताया कि वह करीब तीन दशक पहले ही गायब हो गया था। सुराग उसके भाई सुरेश बाबू से मिला, जो किला क्षेत्र में रहते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदीप ने वर्षों पहले मुस्लिम धर्म अपना लिया है और मुरादाबाद के मोहल्ला करूला में ड्राइवर बनकर रह रहा है। इस सूचना के बाद टीम मुरादाबाद पहुँची, जहाँ ट्रांसपोर्ट नगर में लोगों ने बताया कि एक ड्राइवर ‘अब्दुल रहीम उर्फ़ सक्सेना’ करीब तीस साल से गाड़ी चलाता है।इसी बीच खबर मिली कि वह किसी काम से बरेली आया है। पुलिस ने जाल बिछाया और डेलापीर मंडी में एक संदिग्ध व्यक्ति को घेरा। पहले उसने अपना नाम अब्दुल रहीम बताया, पर जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की तो उसकी तीन दशक पुरानी पहचान पिघल गई। उसने कबूल किया हाँ, मैं ही प्रदीप सक्सेना हूँ 1989 में पैरोल पर आया था, फिर वापस नहीं गया 2002 में धर्म बदल लिया। करीब 11 बजे पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया। गिरफ्तारी टीम में प्रेमनगर इंस्पेक्टर प्रयागराज सिंह, दरोगा मोहम्मद सरताज, और कांस्टेबल अनुराग शामिल रहे। तीन दशक तक झूठ की परतों में छिपा यह आरोपी आखिरकार कानून की पकड़ में आ ही गया। यह गिरफ्तारी सिर्फ एक केस का अंत नहीं, बल्कि यह संदेश है कि नाम बदलकर, शहर बदलकर या धर्म बदलकर भी न्याय से बचा नहीं जा सकता।