बरेली समाचार: सेंथल के शिव पार्वती मंदिर में अखंड रामायण पाठ शुरू
बरेली समाचार: सेंथल के श्री शिवपार्वती मौर्य मंदिर में अखंड श्रीरामचरितमानस पाठ का आयोजन। हवन-पूजन के बाद शनिवार को होगा विशाल भंडारा।
मोहल्ला चौधरी स्थित श्री शिवपार्वती मौर्य मन्दिर में धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन।
शुक्रवार प्रातःकाल से शुरू हुआ श्रीरामचरितमानस का अखंड पाठ, शनिवार सुबह आरती के साथ होगा विश्राम।
अनुष्ठान के समापन पर हवन-पूजन और यज्ञ के पश्चात मौर्य समाज द्वारा कराया जाएगा विशाल भंडारा।
धार्मिक आयोजन में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, भजनों और चौपाइयों से गूंज उठा पूरा परिसर।
सरफराज़ खान / जन माध्यम
बरेली। कस्बा सेंथल के मोहल्ला चौधरी स्थित श्री शिवपार्वती मौर्य मन्दिर में धार्मिक उत्सव का माहौल बना हुआ है। मन्दिर परिसर में शुक्रवार प्रातःकाल से पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ श्रीरामचरितमानस का अखंड पाठ पढ़ा जा रहा है। इस धार्मिक अनुष्ठान के चलते पूरा क्षेत्र प्रभु श्रीराम की भक्ति में लीन नजर आ रहा है। अखंड पाठ का मुख्य विश्राम शनिवार प्रातःकाल की आरती के साथ सुनिश्चित किया गया है।
आयोजन समिति से प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह पाठ के समापन के बाद वैदिक मंत्रोचार के बीच मुख्य आरती, विशेष हवन और यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इसके तत्पश्चात मौर्य समाज के सौजन्य से एक विशाल भंडारे की व्यवस्था की गई है। इस महाप्रसाद वितरण कार्यक्रम में आस-पास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने और प्रसाद ग्रहण करने की संभावना जताई गई है, जिसे लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
मन्दिर के पुजारियों और विद्वानों ने इस अवसर पर ग्रंथ के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 15वीं शताब्दी में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित यह महाकाव्य मानव समाज को जीवन जीने की कला सिखाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि कृत रामायण में जहां श्रीराम को एक आदर्श मानव के रूप में दिखाया गया है, वहीं गोस्वामी जी ने उन्हें भगवान विष्णु का साक्षात अवतार मानकर मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में प्रस्तुत किया है।
धार्मिक ग्रंथों के इतिहास के अनुसार, इस महाकाव्य की रचना में 2 वर्ष 7 माह 26 दिन का समय लगा था और इसे संवत 1633 के मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष में पूर्ण किया गया था। अवधी भाषा में रचित इस अनुपम ग्रंथ को 7 काण्डों (बालकाण्ड, अयोध्याकाण्ड, अरण्यकाण्ड, किष्किन्धाकाण्ड, सुन्दरकाण्ड, लंकाकाण्ड और उत्तरकाण्ड) में विभक्त किया गया है। सेंथल में आयोजित इस पाठ में प्रत्येक श्रद्धालु की अनन्य आस्था दिखाई दे रही है और लोग भक्तिभाव के साथ भजनों का आनंद ले रहे हैं।