मासूम आहों ने खटखटाया सिस्टम का दरवाज़ा
बीडीए वीसी सौम्या पांडे के नेतृत्व में मॉल और कोचिंग सेंटरों की जांच, खामियां मिलने पर फटकार
लखनऊ अग्निकांड के बाद बरेली में चला सघन सुरक्षा अभियान।
बीडीए वीसी सौम्या पांडे ने मॉल और कोचिंग सेंटरों की व्यवस्थाएं परखी।
खामियां मिलने पर फटकार, सुरक्षा मानकों से समझौते पर सख्त चेतावनी।
जन माध्यम
बरेली। कुछ हादसे सिर्फ इमारतों को नहीं जलाते, बल्कि समाज के ज़मीर को भी झुलसा देते हैं। लखनऊ के अलीगंज में कोचिंग सेंटर में लगी आग की लपटों ने जब मासूम सपनों को अपनी आगोश में लिया, तो पूरे प्रदेश की फिज़ा ग़मगीन हो गई। किसी मां की गोद सूनी हुई, किसी पिता की उम्मीद राख में तब्दील हो गई। उन आहों और सिसकियों की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि जिले में प्रशासन हरकत में आ गया। मंगलवार को शहर ने एक ऐसा मंज़र देखा, जहां सरकारी अमला सिर्फ निरीक्षण करने नहीं, बल्कि आने वाले किसी संभावित दर्द को रोकने निकला था। बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडे के नेतृत्व में अग्निशमन विभाग और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम जब मॉल, कोचिंग सेंटरों और बहुमंजिला इमारतों में पहुंची, तो यह साफ महसूस हुआ कि यह कार्रवाई महज़ औपचारिकता नहीं, बल्कि इंसानी जानों की हिफाज़त का मिशन है। सिविल लाइंस स्थित सिटी सेंटर एलए मॉल से लेकर शहर के कई नामचीन कोचिंग संस्थानों तक सुरक्षा इंतज़ामों की परत दर परत जांच की गई। फायर सेफ्टी उपकरणों की हालत देखी गई, इमरजेंसी एग्जिट की हकीकत परखी गई और यह सुनिश्चित किया गया कि कहीं मुनाफे की अंधी दौड़ में बच्चों की जिंदगी दांव पर तो नहीं लगाई जा रही। आकाश इंस्टीट्यूट समेत कई शिक्षण संस्थानों में निरीक्षण के दौरान बेसमेंट में संचालित गतिविधियों पर विशेष नजर रखी गई। अधिकारियों का मानना है कि हादसे कभी दस्तक देकर नहीं आते, और जब आते हैं तो लापरवाही की छोटी सी दरार भी बड़ी तबाही का सबब बन जाती है। हाल ही में सिटी सेंटर मॉल में लिफ्ट बंद होने की घटना ने भी प्रशासन को सतर्क कर दिया था। निरीक्षण के दौरान जब कुछ जगहों पर सुरक्षा मानकों में कमी दिखाई दी, तो जिम्मेदारों को कड़ी फटकार मिली। संदेश बिल्कुल साफ था अब सुरक्षा के नाम पर दिखावा नहीं चलेगा। इस पूरे अभियान में सबसे ज्यादा जो बात लोगों के दिल को छू गई, वह थी बीडीए वीसी सौम्या पांडे की संवेदनशील सोच। उन्होंने यह एहसास कराया कि प्रशासन का असली मकसद सिर्फ नियम लागू करना नहीं, बल्कि उन घरों की खुशियां सुरक्षित रखना है, जहां से हर सुबह बच्चे अपने सपनों को लेकर निकलते हैं। दरअसल, विकास की असली तस्वीर ऊंची इमारतों और चमकदार मॉलों से नहीं बनती, बल्कि उन सुरक्षित रास्तों से बनती है जिन पर आम आदमी बेखौफ चल सके। लखनऊ की दर्दनाक त्रासदी ने जो सबक दिया, उसे जिले में सौम्या पांडे ने जिम्मेदारी की नई मिसाल में बदलने का प्रयास किया है।
यह सिर्फ एक जांच अभियान नहीं, बल्कि उन अनदेखे खतरों के खिलाफ जंग है, जो कभी भी किसी परिवार की दुनिया उजाड़ सकते हैं। और शायद यही वजह है कि आज जिले में लोग इस कार्रवाई को एक अफसर की ड्यूटी नहीं, बल्कि इंसानियत के प्रति उसकी जवाबदेही के रूप में देख रहे हैं।