जर्जर बिजली लाइन बनी मौत का खतरा

बरेली के शाही क्षेत्र में जर्जर बिजली लाइन से 30 गांवों के हजारों उपभोक्ता खतरे में विभाग पर लापरवाही के आरोप

जर्जर बिजली लाइन बनी मौत का खतरा
HIGHLIGHTS:

टूटते तारों से बना हादसे का खतरा

30 गांवों के हजारों लोग प्रभावित

अधूरा काम छोड़ने के आरोप

विभाग ने जल्द कार्रवाई का दिया आश्वासन

जन माध्यम
शाही, बरेली।
हर झूलता हुआ तार यहां लोगों को मौत का अहसास कराता है और हर टूटती लाइन किसी बड़े हादसे की दस्तक जैसी लगती है। शाही पावर हाउस से जुड़े कूड़का नगरीय फीडर की हालत इन दिनों इतनी जर्जर हो चुकी है कि लोग बिजली से ज्यादा उसके खतरे से डरने लगे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि इस फीडर से जुड़े करीब 30 गांवों के लगभग 3000 उपभोक्ता रोजाना जोखिम के साए में जी रहे हैं। हल्की हवा या बारिश होते ही तार टूटकर जमीन पर गिर जाते हैं। कई बार ग्रामीण और पशु इन टूटे तारों की चपेट में आने से बाल बाल बचे हैं।

स्थिति को और गंभीर बनाती है लाइन की तकनीकी खामियां। कई जगह खंभों के बीच दूरी 80 से 100 मीटर तक है, जिससे तार ढीले होकर खतरनाक तरीके से झूलते रहते हैं। गर्मी में लोड बढ़ते ही ये तार चिंगारी के साथ टूटकर गिरते हैं और खेतों से लेकर घरों तक खतरा पैदा कर देते हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब करीब दो वर्ष पहले इस लाइन का सर्वे हो चुका था तो काम अधूरा क्यों छोड़ दिया गया। कई जगह खंभे तो लगा दिए गए लेकिन तार नहीं डाले गए। बुझिया पेट्रोल पंप से जिया नगला तक अधूरी लाइन आज भी विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि काम शुरू कर छोड़ देना यहां आम बात बन चुकी है और जिम्मेदार विभाग कागजों में ही सुधार दिखाता रहा है। छह वर्ष पहले नारा गांव के भागवान दास की करंट लगने से मौत भी इसी लापरवाही की दर्दनाक याद दिलाती है, लेकिन इसके बाद भी हालात में ठोस सुधार नहीं हुआ।

हालांकि विभाग की ओर से सफाई भी सामने आई है। एसडीओ मीरगंज सूर्य प्रताप का कहना है कि मामला संज्ञान में है और जल्द ही कार्य शुरू कराया जाएगा।

अब सवाल यही है कि क्या इस बार सच में जर्जर लाइन बदलेगी या फिर कोई बड़ा हादसा होने के बाद ही सिस्टम जागेगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।