स्वतंत्रता सेनानी रामकुमार को सम्मान दिलाने की मांग

बरेली निवासी सुधीर उपाध्याय ने अपने चाचा एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. रामकुमार का नाम शिलापट्ट पर पुनः अंकित कराने की मांग की है। मांग पूरी न होने पर 15 अगस्त 2026 से आमरण अनशन की चेतावनी दी है।

स्वतंत्रता सेनानी रामकुमार को सम्मान दिलाने की मांग
HIGHLIGHTS:

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. रामकुमार का नाम शिलापट्ट पर दोबारा दर्ज कराने की मांग।

भतीजे सुधीर उपाध्याय ने 15 अगस्त 2026 से आमरण अनशन की अनुमति मांगी।

प्रशासन को कई बार दस्तावेज सौंपने के बावजूद कार्रवाई न होने का दावा।

जन माध्यम
बरेली।
महानगर कॉलोनी, पीलीभीत बाईपास रोड निवासी सुधीर उपाध्याय ने अपने सगे चाचा एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय रामकुमार को उचित सम्मान दिलाने की मांग को लेकर शासन-प्रशासन से गुहार लगाई है। उन्होंने कहा है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह 15 अगस्त 2026 से गजरौला ब्लॉक कार्यालय, जनपद अमरोहा स्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के शिलापट्ट के सामने आमरण अनशन शुरू करेंगे। इसके लिए उन्होंने प्रशासन से अनुमति भी मांगी है।

सुधीर उपाध्याय के अनुसार उनके चाचा रामकुमार पुत्र भीमसेन, ग्राम कांकाठेर (वर्तमान जनपद अमरोहा) के निवासी थे और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहे। उनका दावा है कि तत्कालीन जिलाधिकारी मुरादाबाद के.एल. मेहता (आईसीएस) के आदेश पर 8 मई 1941 को डीआईआर की धारा 34/38 के तहत उन्हें छह माह के कारावास और 25 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। बाद में 25 नवंबर 1941 को उन्हें मुरादाबाद जिला कारागार से रिहा किया गया।

उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने के कारण सरकार द्वारा ग्राम शहबाजपुर डोर, तहसील हसनपुर (जनपद अमरोहा) में उन्हें लगभग पौने दो बीघा भूमि भी आवंटित की गई थी। उनका आरोप है कि पहले गजरौला ब्लॉक कार्यालय के शिलापट्ट पर रामकुमार का नाम दर्ज था, लेकिन नया शिलापट्ट लगाए जाने के बाद उनका नाम हटा दिया गया।

सुधीर उपाध्याय का कहना है कि वह पिछले पांच वर्षों से संबंधित अधिकारियों को कारागार अधीक्षक, मुरादाबाद द्वारा जारी प्रमाणपत्र तथा भूमि की खतौनी सहित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराते रहे हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि 11 जून को जिलाधिकारी अमरोहा तथा 19 जून को उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में उन्होंने मांग की है कि यदि रामकुमार को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती तो सरकार द्वारा आवंटित भूमि वापस ले ली जाए और यदि उपलब्ध प्रमाणपत्र असत्य है तो उसे भी निरस्त किया जाए।

उन्होंने कहा कि उनकी प्रमुख मांग स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय रामकुमार का नाम गजरौला ब्लॉक कार्यालय और ग्राम सचिवालय कांकाठेर में लगे शिलापट्ट पर पुनः अंकित कर सम्मान बहाल करने की है। इसी मांग को लेकर उन्होंने 15 अगस्त 2026 से प्रस्तावित आमरण अनशन की अनुमति देने का भी अनुरोध किया है।