मेरठ में मस्तिष्क,नाक रोग का सफल इलाज
मेरठ मेडिकल कॉलेज में 13 वर्षीय बच्चे का दुर्लभ मस्तिष्क-नाक दोष का सफल ऑपरेशन। निजी अस्पतालों में 3-4 लाख, यहां सिर्फ 22 हजार में ठीक!
➡️ 13 साल के बच्चे का जन्मजात मस्तिष्क-नाक छिद्र रोग
➡️ दिमाग नाक से बाहर धड़कता था, बार-बार बुखार-गर्दन अकड़न
➡️ निजी अस्पतालों ने बताया 3-4 लाख का खर्च
➡️ मेरठ मेडिकल कॉलेज में सिर्फ 22 हजार में सफल सर्जरी
➡️ डॉ. अखिल प्रकाश शर्मा और टीम ने धातु की जाली से भरा छिद्र
➡️ बच्चा पूरी तरह स्वस्थ, सामान्य जीवन जी रहा
➡️ प्राचार्य ने टीम को दी बधाई - गरीबों के लिए बड़ी राहत
13 वर्षीय मरीज स्वस्थ, न्यूरो शल्य चिकित्सा विभाग की टीम ने किया कम खर्च में उपचार
जन माध्यम
मेरठ। पश्चिम उत्तर प्रदेश के पुराने और प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान, मेडिकल कॉलेज मेरठ में न्यूरो शल्य चिकित्सा विभाग ने एक अत्यंत जटिल मस्तिष्क-नाक दोष रोग का सफल उपचार कर चिकित्सा क्षेत्र में नया उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह दुर्लभ रोग 13 वर्षीय मरीज, निवासी खेकड़ा, बागपत में पाया गया, जिसमें जन्म से ही मस्तिष्क की तली और नाक की हड्डी पूरी तरह विकसित नहीं हुई थी। इसके कारण मरीज का दिमाग इस छिद्र द्वारा सांस एवं खांसी के साथ बाहर एवं अंदर धड़कता था। मरीज को लगातार मस्तिष्क संबंधी बुखार, गर्दन अकड़ने और दृष्टि में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था।मरीज के परिजनों ने पहले कई निजी चिकित्सालयों का रुख किया, जहां उपचार के लिए लाखों रुपए का खर्च बताया गया। तब उन्होंने मेरठ मेडिकल कॉलेज के विशेष सुविधा खंड के न्यूरो शल्य चिकित्सा विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. अखिल प्रकाश शर्मा से संपर्क किया। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने आवश्यक जांचें कर मरीज की स्थिति का मूल्यांकन किया और मस्तिष्क-नाक दोष रोग का निदान किया।शल्य चिकित्सा अत्यंत जटिल थी। मस्तिष्क की झिल्ली को धीरे-धीरे हटाकर रिक्त स्थान को धातु की जाली से भरा गया। इस सफल शल्य चिकित्सा में डॉ. अखिल प्रकाश शर्मा, डॉ. प्रशांत शर्मा, डॉ. वसीम, डॉ. रुपेश और डॉ. राहुल की विशेषज्ञ टीम ने भाग लिया।शल्य चिकित्सा के पश्चात मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गए हैं और सामान्य जीवन जीने लगे हैं। विभागाध्यक्ष ने बताया कि इस जटिल उपचार की लागत निजी चिकित्सालयों में तीन से चार लाख रुपए होती, जबकि मेडिकल कॉलेज मेरठ में राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार केवल लगभग बाईस हजार रुपए में सफल उपचार संपन्न हुआ।प्राचार्य ने न्यूरो शल्य चिकित्सा विभाग और चिकित्सकों की इस उपलब्धि पर बधाई दी और इसे मरीज हित तथा समाज सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बताया। यह सफलता न केवल चिकित्सा विज्ञान में उत्कृष्टता को दर्शाती है, बल्कि गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी राहत भी है।