नफरत को मिटाने वाले ही सच्चे देशभक्त: सुब्हानी मियां, दरगाह प्रमुख का मोहब्बत का संदेश एक मिसाल कायम करने वाली पहल
बरेली। दरगाह आला हजरत के प्रमुख हजरत अल्लामा सुब्हान रजा खान सुब्हानी मियां ने रमजान और होली के संयोग को देखते हुए जो पैगाम दिया है, वह न सिर्फ मुस्लिम समाज बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है।
यह संदेश सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं बल्कि एक ऐसा अमल है, जिसे अपनाकर समाज में अमन-चैन और भाईचारे की मिसाल कायम की जा सकती है। रमजान का महीना बरकतों, रहमतों और इबादत का वक्त होता है। वहीं, होली रंगों का त्योहार है, जिसे हिंदू धर्म के लोग बड़े उत्साह से मनाते हैं। इस बार इन दोनों त्योहारों का संयोग एक खास स्थिति पैदा कर रहा है, जहां धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए संयम और समझदारी की आवश्यकता है।
दरगाह प्रमुख ने अपने संदेश में न सिर्फ रोज़ेदारों को बल्कि पूरे समाज को यह सिखाया कि कैसे एक दूसरे के त्योहारों की इज्जत की जाए और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाया जाए। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना गरीबों और बेसहारा लोगों की मदद करने की सीख देता है। यही वजह है कि यह वक्त हमें बताता है कि हमें न सिर्फ अपनी इबादत पर ध्यान देना चाहिए बल्कि दूसरों के सुख-दुख में भी शरीक होना चाहिए।
दरगाह प्रमुख ने अपने पैगाम में यह स्पष्ट किया कि इस बार रमजान के जुमे के दिन होली का त्योहार पड़ने के कारण प्रशासन और आम लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि वे अपने कपड़ों और इबादतगाहों की पाकी व सफाई का विशेष ध्यान रखें और जहां तक संभव हो, रंगों से बचाव करें। उन्होंने खासतौर पर कहा कि मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में जुमे की नमाज को तयशुदा समय पर ही अदा करें और जहां मिश्रित आबादी हो तथा मस्जिदों के पास से होली के जुलूस निकलते हों, वहां नमाज के समय को जरूरत के मुताबिक 2:30 बजे तक आगे बढ़ाया जा सकता है।इस अपील का मकसद यह था कि किसी भी तरह का टकराव न हो और धार्मिक सौहार्द बना रहे। यह संदेश दर्शाता है कि जब धर्मगुरु समाज के हित में आगे बढ़कर बात करते हैं, तो वे सिर्फ अपने समुदाय की नहीं, बल्कि पूरे देश की भलाई के लिए सोचते हैं।दरगाह प्रमुख ने रमजान के मौके पर गरीबों की मदद करने, जकात व सदका देने की खास ताकीद की। उनका कहना था कि यह महीना हमें यह सीख देता है कि हमारे पास जो दौलत है, उसमें गरीबों और जरूरतमंदों का भी हक है। यही वजह है कि इस महीने में जकात देने की परंपरा है, ताकि समाज के कमजोर तबके को भी ईद की खुशियों में शामिल किया जा सके।इस संदेश के माध्यम से उन्होंने सिर्फ मुस्लिम समाज को नहीं बल्कि पूरे देश को यह सीख दी कि यदि अमीर लोग जरूरतमंदों की मदद करें, तो समाज में कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोएगा और हर कोई खुशहाल जिंदगी जी सकेगा।भारत एक ऐसा देश है जहां विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ रहते हैं और सभी के त्योहार मिलजुलकर मनाए जाते हैं। यह भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है। दरगाह प्रमुख ने अपने संदेश में इसी संस्कृति की हिफाजत करने और धार्मिक सहिष्णुता को बनाए रखने की बात कही।
उनका यह पैगाम सिर्फ मुस्लिम समाज तक सीमित नहीं बल्कि पूरे देश के लिए है। उन्होंने नफरत को खत्म करने और मोहब्बत को बढ़ाने की जो सीख दी, वह हर भारतीय के लिए प्रेरणादायक है। जब तक समाज में भाईचारा बना रहेगा, तब तक देश तरक्की करेगा और हर धर्म के लोग शांति से रह सकेंगे।