"परवाह" बनी जन-जन की आवाज़, बरेली जोन से उठी लहर ने बदल दी सड़क सुरक्षा की तस्वीर

रमित शर्मा आईपीएस, एडीजी जोन बरेली
HIGHLIGHTS:

1. पुलिस बनी इंफ्लुएंसर
2. आम जनता ने कहा अब हमें है "परवाह"

Bareilly News: हवाओं के सहारे पतंगें उड़ती हैं, चट्टानें नहीं। चट्टानें तूफानों की दिशा मोड़ती हैं। ये पंक्तियाँ आज यूपी पुलिस के एक अनोखे अभियान पर सटीक बैठती हैं  नाम है "परवाह"। बरेली जोन के एडीजी रमित शर्मा की अगुवाई में चलाया गया ये डिजिटल सड़क सुरक्षा अभियान न सिर्फ ट्रेंड बना, बल्कि आंदोलन बन गया। एक ऐसा अभियान जो केवल ट्रैफिक नियम नहीं सिखा रहा, बल्कि सोच बदल रहा है।

पुलिस बनी इंफ्लुएंसर

19 अप्रैल से 19 मई 2025 तक पूरे एक महीने चले इस डिजिटल महाअभियान ने सोशल मीडिया की ताकत को बखूबी इस्तेमाल किया। 11 सोशल मीडिया टीमों की बदौलत परवाह ने डिजिटल दुनिया में ऐसा धमाका किया कि आंकड़े खुद बोलने लगे। 1 करोड़ से अधिक डिजिटल व्यूज़, 10.4 लाख+ सोशल इंटरेक्शन, 5785+ सोशल मीडिया पोस्ट, 1144 वीडियो, 1828 फोटो, 210 अख़बारी कटिंग और 2618 टेम्पलेट्स का उपयोग, एक महीने में परवाह ने एक्स पर 1.90 लाख रीपोस्ट, और फेसबुक पर 38,500 से अधिक शेयर बटोरे।

आम जनता ने कहा अब हमें है "परवाह"

कभी जिसे पुलिस का काम समझा जाता था, आज वो आम लोग खुद कर रहे हैं  सड़क सुरक्षा का संदेश फैलाना। बच्चे हों या बुज़ुर्ग, महिलाएं हों या कॉलेज स्टूडेंट्स – सबने इसे अपनाया। 1999 बैच के आईपीएस रमित शर्मा का ये विज़न अब मूवमेंट बन चुका है। सिर्फ चालान नहीं, समझाना ज़रूरी है – इस सोच ने पुलिस और जनता के बीच एक नया रिश्ता बनाया।

अवॉर्ड्स भी, पारदर्शिता भी

अभियान को और सशक्त बनाने के लिए सोशल मीडिया टीमों के लिए प्रथम, द्वितीय, तृतीय पुरस्कार भी घोषित किए गए। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डीआईजी मुरादाबाद रेंज मुनिराज की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई। जिसमें रामपुर रहा प्रथम, बरेली को मिला दूसरा स्थान, बरेली ट्रैफिक पुलिस तीसरे पायदान पर रही, प्रोत्साहन पुरस्कार मिला मुरादाबाद, मुरादाबाद ट्रैफिक और बदायूं को मिला।

एआई और इन्फ्लुएंसर का भी योगदान

परवाह की डिजिटल उड़ान में AI PRO जारविस और ज़ोन के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की अहम भूमिका रही। उन्होंने कंटेंट क्रिएशन से लेकर मैसेज डिलीवरी तक हर कदम पर साथ निभाया। सड़क पर अब सिर्फ गाड़ियाँ नहीं, परवाह भी चल रही है... और जब "परवाह करने वाले" सड़क पर उतरते हैं, तो एक्सीडेंट नहीं, बदलाव होता है।