स्मृतियों में उतरे राष्ट्रनिर्माता, सैंथल में श्रद्धा का संगम
सैंथल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती श्रद्धा के साथ मनाई गई। पुष्पांजलि अर्पित कर उनके आदर्शों पर चलने और सुशासन के संकल्प को दोहराया गया।
➡️ सैंथल में श्रद्धा के साथ मनाई गई दोनों महापुरुषों की जयंती
➡️ चित्रों पर पुष्प अर्पित कर किया गया नमन
➡️ राष्ट्रनिर्माण में योगदान को किया गया स्मरण
➡️ सुशासन और लोककल्याण का लिया गया संकल्प
➡️ भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की सहभागिता
जन माध्यम।
सरफराज़ खान। सैंथल (बरेली)।
कुछ नाम केवल इतिहास के पन्नों में दर्ज नहीं होते, वे विचार बनकर पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते हैं। ऐसे ही दो युगपुरुष—पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंडित मदन मोहन मालवीय—की जयंती सैंथल कस्बे में श्रद्धा, सम्मान और सुशासन के संकल्प के साथ मनाई गई।
इस अवसर पर दोनों महान विभूतियों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया गया और उनके राष्ट्रनिर्माण में दिए गए योगदान को याद किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित जनों ने उनके विचारों और आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
भाजपा किसान मोर्चा के जिला महामंत्री एडवोकेट नीतीश उपाध्याय ने दोनों हस्तियों को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन देश सेवा को समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे महान व्यक्तित्वों को स्मरण करना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का अवसर है।
युवा भाजपा नेता विनय चौधरी ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी और पंडित मदन मोहन मालवीय का जीवन लोकसेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण की मिसाल है। उन्होंने कहा कि उनके आदर्शों पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों महान विभूतियों की जयंती सुशासन दिवस के रूप में मनाई जा रही है, ताकि उनके विचारों को समाज तक पहुंचाया जा सके।
कार्यक्रम में मुकेश शर्मा, राहुल गुप्ता, असगर अली सिद्दीकी, हसन मियां, मोहद्दिस मेहदी, ब्रह्मदत्त अवस्थी, उमाकांत जोशी, आशीष देवल, सेवाराम मौर्य, याकूब अली जैदी, अली शहीर जैदी, मुक्तिदा जैदी, अभिनाश मिश्रा, मुनीश मौर्य, राजेंद्र कश्यप, अंकित गुप्ता, ज्ञानसिंह यादव, विचित्र शंखधर, अनुपम पंडित सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सच्चा नेतृत्व सत्ता से नहीं, सेवा और चरित्र से पहचाना जाता है। अटल और मालवीय जैसे महापुरुषों की स्मृति आज भी राष्ट्र की आत्मा को दिशा देती है।