विजिलेंस थाने में रिश्वत का आरोप

बरेली के विजिलेंस थाने में रिश्वत मांगने का आरोप, चीफ इंजीनियर ज्ञान प्रकाश ने सख्त संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए।

विजिलेंस थाने में रिश्वत का आरोप
HIGHLIGHTS:

➡️ विजिलेंस थाने में रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप
➡️ एनओसी जमा कराने के नाम पर पैसे मांगने की शिकायत
➡️ सिपाही सौरभ पर सीधे तौर पर आरोप

जन माध्यम
बरेली।
बिजली चोरी रोकने के नाम पर जिस विजिलेंस थाने को व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, वही थाना आज खुलेआम भ्रष्टाचार का अड्डा बनता जा रहा है। कानून के नाम पर वसूली, कार्रवाई के नाम पर सौदेबाज़ी और सरकारी जिम्मेदारी के नाम पर निजी जेबें भरने का खेल यह सब कुछ विजिलेंस थाने की चारदीवारी के भीतर बेखौफ चल रहा है। सवाल यह नहीं कि बिजली चोरी पकड़ी जा रही है या नहीं।

सवाल यह है कि चोरी पकड़ने के बाद न्याय बिक क्यों रहा है? सूत्रों के मुताबिक, बिजली चोरी के मामले विजिलेंस थाने पहुंचते ही रेट लिस्ट शुरू हो जाती है कहीं चार हजार कहीं दो हजार भरोसा दिलाया जाता है कि जमानत हो जाएगी, कागज जमा हो जाएंगे, मामला दब जाएगा। कुछ महीने पहले विजिलेंस थाने के थाना प्रभारी  एक इंस्पेक्टर को एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथों पकड़कर जेल भेजा, लेकिन हैरानी की बात यह है कि एक गिरफ्तारी भी सिस्टम को नहीं जगा सकी। भ्रष्टाचार थमा नहीं, बल्कि और निर्लज्ज होकर सामने आ गया।
ताज़ा मामला शुक्रवार का है। दो लोग बिजली चोरी की एनओसी अधिशासी अभियंता से लेकर विजिलेंस थाने पहुंचे। वहां मौजूद सिपाही सौरभ ने साफ शब्दों में कह दिया दो हजार रुपए के साथ में देना होगे तभी एनओसी जमा होगी। यह सिर्फ रिश्वत नहीं थी, यह कानून का खुला अपमान था। एक तरफ विभाग पर बिजली चोरी रोकने और राजस्व बढ़ाने की जिम्मेदारी है, दूसरी तरफ वही जिम्मेदारी निभाने वाले लोग वसूली में जुटे हैं। क्या यही सरकारी सेवा है? जब इस पूरे मामले पर सीओ विजिलेंस से सवाल किया गया कि सिपाही सौरभ द्वारा रिश्वत मांगे जाने की शिकायत है, तो जवाब आया प्रार्थना पत्र आने दीजिए, जांच कर कार्रवाई करूंगा। सवाल यह है कि सीओ की नाक के नीचे थाना होते हुए भी भ्रष्टाचार क्यों नहीं दिखता? क्या शिकायत आने तक सिस्टम अंधा बना रहता है?
लेकिन इसी अंधेरे में एक नाम है, जो रोशनी बनकर खड़ा है,चीफ इंजीनियर ज्ञान प्रकाश। जैसे ही उन्हें इस शर्मनाक हरकत की जानकारी मिली, उन्होंने बिना देर किए विजिलेंस थाने के दरोगा सोलंकी और सिपाही सौरभ को तलब किया। दरोगा सोलंकी तो पेश हुए, लेकिन सिपाही सौरभ वह अपनी सीट छोड़कर भाग खड़ा हुआ। यह भागना सिर्फ एक सिपाही का नहीं था, यह भ्रष्टाचार की कायरता थी, जो ईमानदारी के सामने टिक नहीं सकी। चीफ इंजीनियर ज्ञान प्रकाश ने साफ और सख्त शब्दों में कहा मेरे रहते कोई भी भ्रष्टाचार नहीं करेगा। अगर कोई करता है तो मुझे तुरंत सूचित किया जाए। यह सिर्फ एक बयान नहीं, सिस्टम को सीधी चेतावनी थी। उनकी इस सख्ती का असर तुरंत दिखा वसूली करने वाला सिपाही गायब हो गया। यही वह नेतृत्व है, जो डर पैदा करता है गलत करने वालों में,और भरोसा जगाता है ईमानदार कर्मचारियों और उपभोक्ताओं में। यह विडंबना है कि बिजली चोरी रोकने और राजस्व बढ़ाने के लिए पावर कॉरपोरेशन करोड़ों रुपये खर्च करता है, तकनीक लाता है, अभियान चलाता है, लेकिन विजिलेंस थानों में बैठे कुछ लोग उस मेहनत को अपनी जेब में डालने में लगे हैं। ऐसे में अगर कोई अधिकारी खुलकर, निडर होकर भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा होता है, तो वह सिर्फ अफसर नहीं रहता वह व्यवस्था की उम्मीद बन जाता है। आज विजिलेंस थाने पर सवालों की बौछार है और जवाबदेही तय होना तय है। वहीं दूसरी ओर, चीफ इंजीनियर ज्ञान प्रकाश का यह कदम यह भरोसा देता है कि सिस्टम पूरी तरह सड़ा नहीं है। अगर इच्छाशक्ति हो, तो भ्रष्टाचार भागता है, ठीक वैसे ही, जैसे सिपाही सौरभ भागा। कार्रवाई अब सिर्फ तय नहीं, ज़रूरी है।

चीफ इंजीनियर ज्ञान प्रकाश ने बताया विजिलेंस थाने से जुड़ा एक मामला आज मेरे संज्ञान में आया है, जिसकी गंभीरता को देखते हुए उसकी गहन जांच कराई जा रही है। संबंधित सिपाही सौरभ को बुलाने के लिए मैंने अपना अर्दली भेजा, लेकिन वह थाने पर मौजूद नहीं पाया गया। मैं साफ कहना चाहता हूं कि रिश्वतखोरी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं होगी। यदि भ्रष्टाचार का कोई भी मामला सामने आता है, तो दोषियों के खिलाफ कठोर और प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।