रेल ट्रैक पर अब हाथी पहले दिखेंगे

पूर्वोत्तर रेलवे ने ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी पहचानने के लिए एआई आधारित सिस्टम लगाने का फैसला किया है।

रेल ट्रैक पर अब हाथी पहले दिखेंगे
HIGHLIGHTS:

➡️ रेल ट्रैक पर हाथियों की पहचान के लिए एआई सिस्टम
➡️ इज्जतनगर मंडल के 99.18 रूट किमी में लगेगी तकनीक
➡️ पहले चरण में 24 रूट किमी क्षेत्र कवर

जन माध्यम 
बरेली।
रेलवे प्रशासन अब रेल परिचालन के साथ साथ वन्यजीवों, विशेषकर हाथियों की सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे ने अत्याधुनिक एआई इनेबल्ड इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम लगाने का फैसला किया है। इस प्रणाली के जरिए ट्रेन चलने से पहले ही ट्रैक पर हाथियों की गतिविधि का पता चल सकेगा।
पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल में कुल 99.18 रूट किलोमीटर पर यह सिस्टम लगाया जाएगा। पहले चरण में 24 रूट किलोमीटर क्षेत्र को कवर किया जा रहा है, जिसमें लालकुआं-गुलरभोज  15.8 किमी, छतरपुर-हल्दी रोड 1.2 किमी, हल्दी रोड-लालकुआं 2.7 किमी, पंतनगर-लालकुआं 1.2 किमी, और लालकुआं-हल्द्वानी 3.2 किमी, शामिल हैं। इसके अलावा काशीपुर रामनगर और खटीमा-बनबसा रेल खंड पर भी यह तकनीक लगाने की प्रक्रिया जारी है।
यह सिस्टम डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसर DAS के माध्यम से काम करता है, जो ऑप्टिकल फाइबर के जरिए जमीन में होने वाली हलचल को पहचान लेता है। हाथियों की चाल और कंपन के पहले से फीड किए गए सिग्नेचर के आधार पर जैसे ही उनकी मौजूदगी ट्रैक के पास महसूस होती है, तुरंत लोको पायलट, स्टेशन मास्टर और कंट्रोल रूम को अलर्ट मैसेज भेज दिया जाता है, जिससे समय रहते ट्रेन की गति कम या उसे रोका जा सके।
रेलवे प्रशासन वन विभाग के साथ मिलकर अन्य सुरक्षा उपाय भी लागू कर रहा है, जिनमें स्पीड लिमिट, चेतावनी साइन बोर्ड, अंडरपास, बाड़, हनी-बी बजर डिवाइस और थर्मल कैमरे शामिल हैं। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में एलिफेंट कॉरिडोर विकसित किए गए हैं। रेलवे का यह कदम न केवल रेल संरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि हाथियों जैसे बहुमूल्य वन्यजीवों की जान बचाने में भी अहम भूमिका निभाएगा। यह पहल तकनीक और संवेदनशीलता के संतुलन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।