बरेली के खुशहाली ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ अज़ीमुश्शान मुशायरा
बरेली के खुशहाली ऑडिटोरियम में अज़ीमुश्शान मुशायरे का आयोजन हुआ, जहां देशभर से आए मशहूर शायरों ने ग़ज़लों और नज़्मों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। देर रात तक तालियों और वाह-वाह की गूंज रही।
➡️ खुशहाली ऑडिटोरियम में सजा अज़ीमुश्शान मुशायरा
➡️ देशभर से आए नामचीन शायरों ने पेश किया बेहतरीन कलाम
➡️ ग़ज़लों और नज़्मों से सजी यादगार साहित्यिक शाम
➡️ तालियों और वाह-वाह से झूमे श्रोता
➡️ प्रेम, समाज और जीवन के रंगों की झलक
➡️ सुखन साज़ फाउंडेशन के आयोजन में उमड़ी भीड़
➡️ उर्दू शायरी को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास
हसीन दानिश/ जन माध्यम
बरेली।
शहर के खुशहाली ऑडिटोरियम में आयोजित अज़ीमुश्शान मुशायरे ने साहित्य-प्रेमियों को शायरी की एक यादगार शाम का तोहफा दिया। इस भव्य आयोजन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए नामचीन शायरों और कवियों ने अपने चुनिंदा कलाम पेश कर श्रोताओं का दिल जीत लिया। देर रात तक तालियों की गड़गड़ाहट और वाह-वाह की सदाएं गूंजती रहीं।
मुशायरे में डॉ. विनीता सिंह, डॉ. बृजभूषण, शान ज़िया, फहीम दानिश, शान मिस्बाही, यूनुस चिश्ती, रिज़वान फरीदी, सुनैना जिलानी सहित कई प्रतिष्ठित शायरों ने अपनी ग़ज़लों और नज़्मों से समां बांध दिया। सुखन साज़ फाउंडेशन के संस्थापक आमिर खान की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम ने उर्दू शायरी की समृद्ध परंपरा को एक नई ऊर्जा दी।
शायरों के कलाम में कहीं प्रेम की मिठास थी तो कहीं समाज की सच्चाइयों का आईना, कहीं जीवन के संघर्ष झलके तो कहीं उम्मीद की रोशनी। हर शेर पर श्रोताओं ने भरपूर दाद दी और माहौल पूरी तरह साहित्यिक रंग में रंगा नजर आया।
कार्यक्रम का आयोजन सुखन साज़ फाउंडेशन की ओर से किया गया था, जिसमें शहर के साहित्य-प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी। आयोजकों का कहना था कि इस तरह के आयोजन उर्दू शायरी और साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
सफल आयोजन के लिए सभी शायरों और आयोजकों को बधाइयां दी गईं और साहित्य प्रेमियों ने ऐसे और कार्यक्रमों की उम्मीद जताई।