कबाड़ी के ढेर में दबा सिस्टम
बरेली के गंगापुरम स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी वाउचर कबाड़ी को बेच दिए गए। मामला खुलने पर विभाग में हड़कंप मच गया और सीएमओ की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
➡️ गंगापुरम स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी वाउचर बिके कबाड़ी को
➡️ विभाग में हड़कंप, जनता पूछे — निगरानी कौन कर रहा था?
➡️ सपोर्ट स्टाफ ज्योति प्रकाश ने किया कबूलनामा
➡️ सीएमओ की जवाबदेही पर उठे सवाल
➡️ महीनों तक रिकॉर्ड गायब, किसी को भनक तक नहीं
➡️ एक मामला खुला — कितने और दफन हैं फाइलों में?
➡️ जनता बोली — जब अफसर सोते हैं, भ्रष्टाचार जागता है
गंगापुरम स्वास्थ्य केंद्र में सीएमओ की लापरवाही बेनकाब
जन माध्यम
बरेली। नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गंगापुरम में जो हुआ, वह सिर्फ एक कर्मचारी की गलती नहीं यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र की नंगी सच्चाई है। सरकारी कागज़, जिन पर गरीब आशाओं के मेहनताने का हक लिखा था, कबाड़ी के तराजू पर तौल दिए गए और प्रशासन तब जागा जब बदबू उठ चुकी थी।सपोर्ट स्टाफ ज्योति प्रकाश का कबूलनामा भले ही पुलिस की एफआईआर में दर्ज हो गया हो, लेकिन सवाल यह है कि यह कबूलनामा अकेले उसी का है या उस सिस्टम का भी जिसने आंखें मूंद लीं? महीनों तक रिकॉर्ड गायब रहे, निरीक्षण का कोई निशान नहीं, और सीएमओ कार्यालय को भनक तक नहीं लगी क्या यही है सरकारी जवाबदेही?मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. विश्राम सिंह का यह कहना कि हमने तुरंत कार्रवाई की अपने आप में व्यवस्था पर तंज है। कार्रवाई तब क्यों नहीं हुई जब रिकॉर्ड गायब थे? जब जुलाई और अगस्त के वाउचर मिल नहीं रहे थे, तब किसने जांच की? सीपीएमयू यूनिट में दस्तावेज़ सुरक्षित रखने की ज़िम्मेदारी किसकी थी? एक सपोर्ट स्टाफ तक ही दोष क्यों सीमित है?यह मामला सिर्फ एक केंद्र तक नहीं रुकना चाहिए, क्योंकि सवाल उठता है अगर गंगापुरम में यह खुलासा हुआ है, तो जाने कितने केंद्रों पर सरकारी रिकॉर्ड कबाड़ के ढेर में बदल चुके होंगे! जब सिस्टम सो रहा हो और जिम्मेदार अफसर आंख मूंदकर बयानबाज़ी कर रहे हों, तो भ्रष्टाचार अपनी जड़ें और गहरी कर लेता है।
जनता के टैक्स से चलने वाले ये दस्तावेज़ गरीबों के अधिकारों की कहानी कहते हैं। लेकिन जब वही दस्तावेज़ कबाड़ी तक पहुँच जाएँ, तो यह सिर्फ चोरी नहीं, विश्वासघात होता है। गंगापुरम का यह मामला बताता है कि बरेली के स्वास्थ्य विभाग में सीएमओ की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है।
लोग अब पूछ रहे हैं अगर एक जगह पकड़ा गया तो बाकी जगह क्या हो रहा होगा?क्या बाकी केंद्रों पर भी ऐसे ही रिकॉर्ड गायब हैं? क्या यह पहली बार है या पहले भी इस सड़ांध को फाइलों में दफना दिया गया?यह घटना चेतावनी है अगर जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता के विश्वास की अंतिम सांस भी यही सिस्टम निकाल देगा। गंगापुरम में जो हुआ, वह सिर्फ एक खबर नहीं, यह सरकारी ईमानदारी का पोस्टमॉर्टम है।कबाड़ी के तराजू पर बिकी फाइलों ने आज यह सिखा दिया जब अफसर सोते हैं, तो भ्रष्टाचार जागता है… और जनता रोती है।