गोवर्धन पूजा में भगवान श्रीकृष्ण को लगा 56 भोग

रामेश्वर धाम में श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस गोवर्धन पूजा हुई। भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग अर्पित कर भजन संध्या का आयोजन किया गया।

गोवर्धन पूजा में भगवान श्रीकृष्ण को लगा 56 भोग
HIGHLIGHTS:

श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग अर्पित किया गया।

कथा व्यास मधुर कृष्ण शास्त्री ने गोवर्धन पूजा का महत्व और विधि बताई।

शाम को वृंदावन और दिल्ली से आए कलाकारों ने भजन-कीर्तन से भक्तों को भावविभोर किया।

जन माध्यम
बरेली।
पावन पितृ पक्ष के अवसर पर भगवान श्रीराम महाप्रभु के पावन धाम रामेश्वर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा। एक अक्टूबर को बरेली के श्रद्धालुओं ने कथा और भजन संध्या में शामिल होकर प्रभु के चरणों में अपनी हाजिरी लगाई।

प्रातःकालीन सत्र में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन वृंदावन धाम से पधारे कथा व्यास पूज्य श्री मधुर कृष्ण शास्त्री के सानिध्य में हुआ। उनके श्रीमुख से श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के साथ भगवान श्रीराम और भोलेनाथ की महिमा का कथा-श्रवण किया।

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग का प्रसाद अर्पित किया गया। श्रद्धालुओं ने टॉफी, खिलौनों और विभिन्न उपहारों से ठाकुर जी को रिझाया। पूरे आयोजन में भक्ति और उल्लास का संगम दिखाई दिया।

कथा व्यास श्री मधुर कृष्ण शास्त्री ने श्रद्धालुओं को गोवर्धन पूजा के धार्मिक महत्व के बारे में बताया। उन्होंने पूजा की विधि भी विस्तार से समझाई। गोवर्धन पूजा के प्रसंग के दौरान कथा पंडाल में श्रद्धालुओं की आस्था देखते ही बनी।

शाम के सत्र में वृंदावन धाम से पधारे पूज्य पारस लाडला और माधुरी शर्मा तथा दिल्ली के महावीर शर्मा के संकीर्तन का भक्तों ने लाभ लिया। भजन-कीर्तन के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

कथा के मुख्य यजमान बनने का सौभाग्य सुशील अरोड़ा, मनोज अरोड़ा, कंचन अरोड़ा और विमी अरोड़ा को प्राप्त हुआ। आयोजन में बरेली से रवि छाबड़ा, सुशील अरोड़ा, गोविंद तनेजा, समीर अरोड़ा, हरीश अरोड़ा, अवधेश अग्रवाल, दीपक अरोड़ा, जगदीश अरोड़ा, राम प्रकाश बत्रा सहित अन्य श्रद्धालुओं ने भी सहभागिता की।

भगवान श्रीराम के पावन धाम रामेश्वर में तीन अक्टूबर तक प्रतिदिन प्रातःकाल श्रीमद्भागवत कथा और शाम को भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं को कथा और संकीर्तन के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ लेने का अवसर मिलेगा।