स्पेशल टेट की तैयारी, बीईओ से मांगी रिपोर्ट
टेट अनिवार्यता को लेकर प्रदेश सरकार ने स्पेशल टेट की तैयारी शुरू कर दी है। बरेली बीएसए ने सभी बीईओ से तीन दिन के भीतर शिक्षकों का विवरण मांगा है।
स्पेशल टेट परीक्षा कराने की तैयारी में जुटा शिक्षा विभाग।
बीएसए ने सभी बीईओ से तीन दिन में शिक्षकों का विवरण मांगा।
टेट अनिवार्यता को लेकर शिक्षक संगठनों में बढ़ी नाराजगी।
इकरार/जन माध्यम
देवरनियां/बरेली। टेट अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश सरकार ने विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (स्पेशल टेट) आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में बरेली की बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. विनीता ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को निर्देश जारी कर तीन दिन के भीतर शिक्षकों का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने को कहा है।
जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने टेट अनिवार्यता से जुड़े विभिन्न रिव्यू पिटीशन खारिज कर दिए हैं। इसके बाद टेट उत्तीर्ण करने की समय सीमा बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 तक कर दी गई है। इस निर्णय का प्रभाव बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षकों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
शासन स्तर से सभी जिलों से यह जानकारी मांगी गई है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कितने शिक्षक टेट अथवा सीटेट उत्तीर्ण हैं और कितने अभी तक पात्रता परीक्षा पास नहीं कर सके हैं। इसी के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
बरेली बीएसए डॉ. विनीता ने सभी बीईओ को निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार यह प्रक्रिया संभावित स्पेशल टेट परीक्षा की तैयारियों का हिस्सा मानी जा रही है।
वहीं दूसरी ओर शिक्षक संगठनों ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। शिक्षक नेताओं का कहना है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति टेट व्यवस्था लागू होने से पहले हुई थी, उन पर बाद में लागू किए गए प्रावधानों को लागू करना उचित नहीं है। इस मुद्दे को लेकर विभिन्न शिक्षक संगठन आंदोलन की रणनीति तैयार कर रहे हैं।
वरिष्ठ शिक्षक नेता हरीश बाबू शर्मा ने कहा कि शिक्षक संगठनों द्वारा सेवा सुरक्षा के लिए कानूनी और संगठनात्मक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि इस विषय पर केंद्र सरकार और जनप्रतिनिधियों को भी ज्ञापन भेजे गए हैं तथा संसद में भी इस मुद्दे को उठाने की मांग की जा रही है।
टेट अनिवार्यता के मुद्दे पर प्रदेश भर में शिक्षक संगठनों की गतिविधियां तेज हो गई हैं और आने वाले दिनों में इस विषय पर व्यापक आंदोलन की संभावना जताई जा रही है।