पश्चिमी यूपी को अलग राज्य बनाने समेत तीन मांगों का ज्ञापन
पश्चिमी यूपी को अलग राज्य, बरेली में एम्स और हाईकोर्ट की स्थायी खंडपीठ की मांग को लेकर शिवसेना ने एसीएम प्रथम को ज्ञापन सौंपा।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की मांग उठाई गई।
बरेली में एम्स और इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्थायी खंडपीठ की मांग भी शामिल।
शिवसेना पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसीएम प्रथम को सौंपा।
जन माध्यम
बरेली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पृथक राज्य का दर्जा देने समेत क्षेत्र से जुड़ी तीन प्रमुख मांगों को लेकर शिवसेना पश्चिमी उत्तर प्रदेश इकाई ने आवाज बुलंद की है। संगठन की ओर से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसीएम प्रथम को सौंपकर पश्चिमी यूपी को अलग राज्य बनाने, बरेली में एम्स की स्थापना करने और इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्थायी खंडपीठ स्थापित करने की मांग की गई।
ज्ञापन मंडल प्रमुख संतोष कुमार सिंह और जिला प्रमुख दीपक पाठक के नेतृत्व में सौंपा गया। पदाधिकारियों ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए क्षेत्र की प्रशासनिक जरूरतों तथा विकास से जुड़े मुद्दों पर अलग से ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
जिला प्रमुख दीपक पाठक ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश कृषि, गन्ना और चीनी उद्योग, दुग्ध उत्पादन, व्यापार, लघु एवं मध्यम उद्योग तथा सेवा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उनके मुताबिक क्षेत्र की प्रशासनिक जरूरतों, संतुलित विकास और आम लोगों तक सुविधाओं की सुगम पहुंच को देखते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश को ‘पश्चिमी प्रदेश’ के रूप में पृथक राज्य बनाया जाना चाहिए।
अलग पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मांग क्षेत्र में लंबे समय से विभिन्न संगठनों और समूहों द्वारा उठाई जाती रही है। हाल में भी शिवसेना ने इस मुद्दे के साथ एम्स और हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर विभिन्न जिलों में गतिविधियां की हैं।
ज्ञापन में बरेली में एम्स की स्थापना की मांग को भी प्रमुखता से रखा गया। पदाधिकारियों का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी, तेजी से बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों को देखते हुए क्षेत्र में उच्चस्तरीय चिकित्सा संस्थान की जरूरत है।
उनका कहना है कि बरेली में एम्स जैसे संस्थान की स्थापना होने से गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी और उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी।
शिवसेना पदाधिकारियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की स्थायी खंडपीठ स्थापित करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से इलाहाबाद तक लंबी दूरी के कारण वादकारियों और अधिवक्ताओं को समय के साथ आर्थिक कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है।
ज्ञापन के जरिए केंद्र सरकार से तीनों मांगों पर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की अपील की गई। पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर हालिया दिनों में भी राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से गतिविधियां सामने आई हैं।