सीएम ग्रिड की सुस्त चाल पर नगर निगम की आखिरी चेतावनी

बरेली में 56 करोड़ की सीएम ग्रिड परियोजना की धीमी रफ्तार और गुणवत्ता में खामियों पर नगर निगम ने फर्म को अंतिम समयसीमा दी।

सीएम ग्रिड की सुस्त चाल पर नगर निगम की आखिरी चेतावनी
ऐआई द्वारा सांकेतिक फोटो।
HIGHLIGHTS:

56 करोड़ की परियोजना निर्धारित समय बीतने के बाद भी अधूरी।

निरीक्षण में सड़क की सतह ऊंची-नीची और बीसी कार्य की गुणवत्ता मिली खराब।

15 अक्तूबर के बाद जुर्माने और फर्म को डिबार करने की चेतावनी।

जन माध्यम
बरेली।
शहर की सड़कों को नई शक्ल देने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री ग्रीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (सीएम ग्रिड) योजना की रफ्तार पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 56 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना तय मियाद गुजरने के बाद भी मुकम्मल नहीं हो सकी है। काम की धीमी गति और निर्माण गुणवत्ता में सामने आई कमियों के बाद नगर निगम ने संबंधित एसोसिएट फर्म पर शिकंजा कसते हुए अंतिम समयसीमा तय कर दी है। अब 15 अक्तूबर तक काम पूरा करना होगा।

सीएम ग्रिड परियोजना को इसी वर्ष फरवरी तक पूरा किया जाना था। निर्धारित समयसीमा बीतने के करीब आठ महीने बाद भी कई काम लंबित हैं। निर्माण कार्य की रफ्तार को लेकर नगर निगम की ओर से पहले भी फर्म को निर्देश दिए जाते रहे हैं, लेकिन अपेक्षित तेजी नहीं आ सकी।

नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य के मुताबिक फर्म को अब स्पष्ट तौर पर 15 अक्तूबर तक परियोजना का काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम की ओर से दोबारा नोटिस जारी कर समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

मामला सिर्फ काम की देरी तक सीमित नहीं है। 25 सितंबर को नगर निगम के अधिकारियों ने निर्माणाधीन सड़कों का जायजा लिया था। निरीक्षण के दौरान बीसी यानी बिटुमिनस कंक्रीट की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के मुताबिक नहीं मिली। सड़क की सतह कई जगह ऊंची-नीची होने के साथ निर्माण से जुड़ी अन्य कमियां भी अधिकारियों की नजर में आईं।

निरीक्षण के बाद नगर निगम ने निर्माण गुणवत्ता को लेकर नाराजगी जाहिर की। इसके अगले दिन यानी 26 सितंबर को फर्म को नोटिस जारी किया गया। इसके बावजूद काम में अपेक्षित तेजी न आने पर अब विभाग ने सख्त रुख अपनाया है।

नगर निगम ने संकेत साफ कर दिए हैं कि 15 अक्तूबर के बाद काम की स्थिति को लेकर किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। अंतिम समयसीमा के बाद भी परियोजना अधूरी मिली या निर्माण में फिर लापरवाही सामने आई तो संबंधित फर्म पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

नियमों के तहत फर्म पर 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा उसे डिबार किए जाने की कार्रवाई भी हो सकती है। ऐसे में अब निर्माण एजेंसी के सामने न सिर्फ अधूरे काम को पूरा करने की चुनौती है, बल्कि पहले सामने आ चुकी गुणवत्ता संबंधी कमियों को भी दूर करना होगा।

शहरवासियों की निगाह अब 15 अक्तूबर की तय मियाद पर है। इसके बाद परियोजना की प्रगति और निर्माण की गुणवत्ता के आधार पर नगर निगम की अगली कार्रवाई तस्वीर साफ करेगी।