बहेड़ी में गन्ना भुगतान पर हंगामा

बरेली के बहेड़ी में समाधान दिवस में गन्ना भुगतान का मुद्दा गरमाया, किसानों ने 146 करोड़ बकाया की मांग उठाई, एडीएम ने अधिकारियों को लगाई फटकार।

बहेड़ी में गन्ना भुगतान पर हंगामा
HIGHLIGHTS:

किसानों ने 146 करोड़ बकाया भुगतान की मांग उठाई

समाधान दिवस में गन्ना मुद्दा छाया

एडीएम ने अधिकारियों को लगाई फटकार

भूमि विवाद और राशन शिकायतें भी सामने आईं

मुमताज अली । जन माध्यम

बहेड़ी। बरेली। खेतों में मेहनत करने वाले किसान जब अपने ही हक के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हों, तो यह सिर्फ समस्या नहीं, व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।

तहसील परिसर में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में इस बार गन्ना मूल्य भुगतान का मुद्दा सबसे ज्यादा गरमाया रहा। भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने केसर चीनी मिल पर 146 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान की मांग जोर-शोर से उठाई।

किसानों का आरोप है कि इसके अलावा चालू पेराई सत्र का करीब 35 करोड़ रुपये का भुगतान भी लंबित है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है। समाधान दिवस में यह मुद्दा छाया रहा और प्रशासन के सामने किसानों की नाराजगी साफ दिखाई दी।

एडीएम प्रशासन पूर्णिमा सिंह ने शिकायतों को गंभीरता से लिया और गन्ना विभाग के अधिकारियों को तलब किया। लेकिन मौके पर केवल एक बाबू के पहुंचने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने जिला गन्ना अधिकारी से फोन पर बात कर जल्द समाधान कराने का आश्वासन दिया।

समाधान दिवस में कुल 40 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से केवल 7 का मौके पर निस्तारण हो सका। आईजीआरएस पोर्टल पर लंबित शिकायतों को लेकर भी एडीएम ने सख्त रुख अपनाया और संबंधित कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कार्यशैली सुधारने के निर्देश दिए।

इस दौरान राशन वितरण और भूमि विवाद से जुड़ी शिकायतें भी बड़ी संख्या में सामने आईं। पूर्ति विभाग की शिकायतों पर एडीएम ने सप्लाई इंस्पेक्टर शांतनु को फटकार लगाते हुए व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए।

वहीं नगर के लोगों ने तालाबों पर हो रहे अवैध कब्जों को लेकर ज्ञापन सौंपा। आरोप है कि कई तालाबों पर निर्माण हो चुका है और नगर पालिका की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। इस पर एडीएम ने एसडीएम को जांच कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

हल्द्वानी निवासी दिलीप कुमार ने भूमि अभिलेखों में गड़बड़ी का गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के उनकी जमीन का नाम खतौनी से हटा दिया गया। मामले को गंभीर मानते हुए एडीएम ने जांच के आदेश दिए हैं और पुराने रिकॉर्ड की भी पड़ताल शुरू करने की बात कही है।

समाधान दिवस में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है क्या किसानों को उनका हक समय पर मिलेगा या फिर यह मुद्दा भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?