बांकेबिहारी मंदिर में भीड़ बेकाबू, श्रद्धालु परेशान

वृंदावन के बांकेबिहारी मंदिर में भारी भीड़ से अव्यवस्था, महिलाओं और बुजुर्गों को दिक्कत, वीआईपी दर्शन पर सवाल।

बांकेबिहारी मंदिर में भीड़ बेकाबू, श्रद्धालु परेशान
HIGHLIGHTS:

मंदिर परिसर और गलियों में भारी भीड़

महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी

वीआईपी दर्शन व्यवस्था पर उठे सवाल

भीड़ प्रबंधन को लेकर प्रशासन पर सवाल

श्याम बिहारी भार्गव । जन माध्यम

मथुरा। आस्था के सबसे बड़े दरबार में ही अगर श्रद्धालु परेशान हो जाएं, तो यह सिर्फ भीड़ नहीं बल्कि व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। वृंदावन के श्रीबांकेबिहारी मंदिर में इन दिनों यही हाल नजर आ रहा है।

मंदिर परिसर से लेकर आसपास की संकरी गलियों तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को धक्कामुक्की के बीच किसी तरह आगे बढ़ना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और बुजुर्गों को झेलनी पड़ रही है।

श्रद्धालुओं का कहना है कि लंबी कतारों में घंटों खड़े रहने के बावजूद कोई स्पष्ट व्यवस्था नजर नहीं आती। गलियों में भीड़ इतनी ज्यादा हो जाती है कि अगर किसी की तबीयत बिगड़ जाए, तो उसे बाहर निकालना तक मुश्किल हो जाता है।

महिलाओं ने खास तौर पर अपनी परेशानी जताई है। उनका कहना है कि उन्हें पुरुषों की भीड़ के बीच ही लाइन में लगना पड़ता है, जिससे कई बार असहज स्थिति बन जाती है। सुरक्षा और सुविधा के नाम पर इंतजाम नाकाफी दिख रहे हैं।

मंदिर में रेलिंग जरूर लगाई गई है, लेकिन श्रद्धालुओं का आरोप है कि सुरक्षा गार्ड ठीक से दर्शन नहीं करने देते। पहले यह तय किया गया था कि गार्ड निर्धारित स्थानों पर ही रहेंगे, लेकिन हकीकत में वे पूरे परिसर में घूमते नजर आते हैं और कई बार अव्यवस्था को बढ़ाते हैं।

सबसे ज्यादा खराब स्थिति पांच नंबर गेट पर बताई जा रही है। यहां से सेवायतों के यजमान और वीआईपी को प्रवेश कराया जाता है। आरोप है कि सामान्य श्रद्धालु घंटों लाइन में लगे रहते हैं, जबकि वीआईपी लगातार अंदर जाते रहते हैं। हाल ही में इसी गेट पर दर्शन को लेकर दो सेवायतों के बीच मारपीट भी हो चुकी है।

हालांकि यहां पुलिस बल तैनात रहता है, लेकिन भीड़ नियंत्रण में उसकी भूमिका सीमित नजर आती है। सिक्योरिटी गार्ड बार-बार वीआईपी को अंदर ले जाने में व्यस्त रहते हैं, जिससे आम भक्तों में नाराजगी बढ़ रही है।

श्रद्धालुओं की मांग है कि वीआईपी दर्शन व्यवस्था को सीमित किया जाए और भीड़ प्रबंधन के लिए ठोस योजना बनाई जाए। खासतौर पर महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा और सुविधा के लिए अलग से इंतजाम किए जाएं।

अब बड़ा सवाल यही है क्या आस्था के इस सबसे बड़े केंद्र में भक्तों को सुकून और सम्मान के साथ दर्शन मिल पाएंगे, या फिर भीड़ और अव्यवस्था ही उनकी किस्मत बनी रहेगी?