नगर निगम की मदद भी अमीरों तक, गरीबों के हिस्से में आश्वासन

बरेली में बारिश के बाद किला छावनी में नदी का पानी घरों तक पहुंचने से लोगों की परेशानी बढ़ गई। नगर निगम और बीडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं।

नगर निगम की मदद भी अमीरों तक, गरीबों के हिस्से में आश्वासन
HIGHLIGHTS:

किला छावनी में नदी का पानी आबादी के बीच पहुंचने से लोग परेशान।

अवैध प्लाटिंग और बस्ती बसने को लेकर नगर निगम व बीडीए पर सवाल।

प्रभावित परिवारों ने आश्वासन के बजाय स्थायी जलनिकासी व्यवस्था की मांग उठाई।

जन माध्यम
बरेली।
बारिश ने बरेली नगर निगम की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। लाजपत नगर में जलभराव की स्थिति में कुछ सुधार हुआ, लेकिन किला छावनी में नदी का पानी सीधे घरों तक पहुंच गया। आबादी के बीच पानी पहुंचने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

सबसे बड़ा सवाल नगर निगम और बीडीए की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। किला छावनी में नदी के आसपास कथित अवैध प्लाटिंग और बस्ती बसने के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में सवाल है कि जब जमीनों का खेल चल रहा था, तब जिम्मेदार अधिकारियों ने कार्रवाई क्यों नहीं की? अब पानी घरों में पहुंचने के बाद प्रभावित लोगों को राहत के बजाय आश्वासन ही क्यों मिल रहा है?

आरोप है कि बीडीए और नगर निगम के अधिकारी दफ्तरों में बैठकर कागजी कार्रवाई तक सीमित रहे और जमीन पर अवैध निर्माण का दायरा बढ़ता गया। नालों की स्थिति सुधारने, जलनिकासी की ठोस व्यवस्था करने और नदी किनारे बसी आबादी को लेकर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।

शहर में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या व्यवस्था गरीब परिवारों की परेशानियों को लेकर उतनी ही गंभीर है, जितनी रसूखदार इलाकों को लेकर। आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के मामलों में तंत्र तेजी से सक्रिय हो जाता है, जबकि गरीबों के घरों में पानी भरने पर उन्हें केवल भरोसा और आश्वासन मिलता है।

जनता के पानी में फंसे होने के बीच अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रभावित परिवारों को अब दिखावटी सक्रियता नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की दरकार है।

नगर निगम और बीडीए को बताना होगा कि नदी किनारे कथित अवैध प्लाटिंग और बस्ती बसने के दौरान जिम्मेदारी किसकी थी, समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई और आज प्रभावित परिवारों की परेशानी का स्थायी समाधान कौन करेगा?

जनता को रील नहीं, राहत चाहिए। आश्वासन नहीं, जलनिकासी चाहिए। सबसे जरूरी, जिम्मेदारों से जवाब चाहिए।