बारिश में डूबा बरेली, स्मार्ट सिटी के दावों पर सवाल
बरेली में बारिश के बाद जलभराव से कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ। सपा के पूर्व प्रवक्ता मयंक शुक्ला ने सांकेतिक नाव चलाकर विरोध जताते हुए स्थायी ड्रेनेज नीति की मांग की।
बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में जलभराव से लोगों को परेशानी हुई।
बेसमेंट, दुकान और गोदामों में पानी भरने से नुकसान की आशंका जताई गई।
मयंक शुक्ला ने स्थायी ड्रेनेज नीति और वैज्ञानिक जल निकासी व्यवस्था की मांग की।
जन माध्यम
बरेली। एक दिन की बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति ने जल निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए। कई जगह बेसमेंट, दुकानों और गोदामों में पानी घुसने से व्यापारियों को लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई गई। जलभराव के चलते कई वाहन खराब होने के साथ लोगों के गिरने और चोटिल होने की घटनाएं भी सामने आईं।
सपा के पूर्व प्रवक्ता मयंक शुक्ला ने स्मार्ट सिटी परियोजना और नगर निगम की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नालों की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बारिश के बाद शहर में जलभराव होना व्यवस्था की प्रभावशीलता पर विचार करने की जरूरत बताता है।
मयंक शुक्ला ने कहा कि हर वर्ष बारिश से पहले होने वाली नाला सफाई के बजाय दीर्घकालिक और वैज्ञानिक जल निकासी नीति बनाई जानी चाहिए। उन्होंने पार्कों और प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग तथा वाटर रिचार्ज सिस्टम विकसित करने की मांग की।
उन्होंने शहर की ड्रोन और आधुनिक तकनीक से मैपिंग कराने का सुझाव दिया, ताकि ऊंचाई और निचले क्षेत्रों की पहचान कर नालों की ढाल, जल निकासी मार्ग और ड्रेनेज व्यवस्था का वैज्ञानिक डिजाइन तैयार किया जा सके।
जलभराव के मुद्दे पर मयंक शुक्ला ने ‘कागज की स्मार्ट सिटी’ के झंडे वाली सांकेतिक नाव चलाकर विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि बारिश के बाद सड़कों और बाजारों में पानी भरने की समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है।
उन्होंने प्रशासन और नगर निगम से वैज्ञानिक ड्रेनेज मास्टर प्लान, ड्रोन आधारित स्थलाकृति सर्वे, वार्डवार वाटर-फ्लो मैप, रेन वाटर हार्वेस्टिंग नेटवर्क और जलभराव वाले स्थानों की स्थायी कार्ययोजना तैयार करने की मांग की।
इस मौके पर मयंक शुक्ला, राहुल यादव, हरजीत सिंह और इस्राफील राशमी मौजूद रहे।