बरेली: ई-पंजीकरण के विरोध में हड़ताल
ई-पंजीकरण व्यवस्था के विरोध में बरेली के दस्तावेज लेखकों ने रजिस्ट्री कार्यालय में धरना-प्रदर्शन कर सरकार से अपनी मांगों पर विचार करने की अपील की।
ई-पंजीकरण व्यवस्था के विरोध में दस्तावेज लेखकों ने रजिस्ट्री कार्यालय में प्रदर्शन किया।
दस्तावेज लेखकों ने रोजगार और आजीविका प्रभावित होने की बात कही।
सरकार से अधिकृत एजेंट के रूप में मान्यता और कल्याण बोर्ड गठन की मांग उठाई।
जन माध्यम
बरेली।उत्तर प्रदेश में लागू ई-पंजीकरण व्यवस्था के विरोध में दस्तावेज लेखक कल्याणकारी समिति सदर, बरेली के बैनर तले दस्तावेज लेखकों ने रजिस्ट्री कार्यालय में धरना-प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष अमर सिंह के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान कार्यालय में तालाबंदी कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई।
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों और तहसीलों में वर्षों से कार्यरत दस्तावेज लेखक संपत्ति बैनामा, वसीयत, बंटवारा, उपहार पत्र और अन्य कानूनी दस्तावेजों के लेखन व पंजीकरण संबंधी कार्य करते रहे हैं। उनका कहना था कि ई-पंजीकरण व्यवस्था लागू होने के बाद अधिकांश प्रक्रियाएं ऑनलाइन हो गई हैं, जिससे उनके रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि दस्तावेज लेखक आम जनता और प्रशासन के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों, बुजुर्गों और तकनीकी जानकारी से वंचित लोगों को आज भी दस्तावेजी प्रक्रियाओं में उनके सहयोग की आवश्यकता पड़ती है।
समिति ने मांग की कि ई-पंजीकरण पोर्टल पर दस्तावेज लेखकों को अधिकृत एजेंट अथवा सहायक के रूप में मान्यता दी जाए। साथ ही सभी ऑनलाइन प्रक्रियाओं में उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा निःशुल्क प्रशिक्षण, तकनीकी संसाधन, आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने तथा प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और पुनर्वास योजना लागू करने की मांग भी उठाई गई।
धरनारत दस्तावेज लेखकों ने राज्य स्तर पर दस्तावेज लेखक कल्याण बोर्ड और कल्याण निधि के गठन की मांग करते हुए कहा कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
धरने में महेंद्र कुमार सक्सेना, सतीश सक्सेना, मनोज विकट, अक्कू साहू, तेजपाल सिंह पटेल, राजेश कुमार सक्सेना, नरेंद्र बाबू और रजनीश शर्मा सहित कई दस्तावेज लेखक मौजूद रहे।