मथुरा में भीषण ट्रैफिक जाम का टॉर्चर
मथुरा और वृंदावन में सोमवार को यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई। गोवर्धन चौराहे, छटीकरा और टाउनशिप पर घंटों लंबे जाम में हजारों गाड़ियां फंसी रहीं। ई-रिक्शा और सड़क निर्माण को जाम की मुख्य वजह बताया जा रहा है।
बेकाबू ट्रैफिक की वजह से महज 10 मिनट की दूरी तय करने में वाहन चालकों और श्रद्धालुओं को एक से डेढ़ घंटे तक का समय लग रहा है।
गोवर्धन और बरसाना में परिक्रमा कर लौट रहे श्रद्धालुओं को गोवर्धन चौराहे, छटीकरा और चौमुहां अंडरपास पर भीषण जाम से जूझना पड़ा।
ई-रिक्शा की अनियंत्रित बाढ़, जगह-जगह चल रहे सड़क निर्माण और वीकेंड-सोमवार की भीड़ के चलते शहर के सभी 15 प्रमुख मार्ग पूरी तरह पैक रहे।
श्याम बिहारी भार्गव/जन माध्यम
मथुरा कान्हा की नगरी मथुरा और वृंदावन में सोमवार को ट्रैफिक मैनेजमेंट के तमाम सरकारी दावे पूरी तरह से हवा-हवाई साबित हुए। सुबह के सूरज की पहली किरण से लेकर देर रात तक पूरा शहर और दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे एन एच 19 गाड़ियों के धुएं और हॉर्न के शोर में डूबा रहा। हालत इस कदर खराब रही कि शहर के भीतर और बाईपास पर वाहनों का ऐसा चक्का जाम हुआ कि रेंगना भी दूभर हो गया। स्थानीय कामकाजी लोगों से लेकर देश के कोने-कोने से आए हजारों तीर्थयात्री इस भीषण उमस और गर्मी के बीच सड़कों पर ही बंधक बने रहे।
जैसा कि ग्राउंड जीरो से आई इस लेटेस्ट तस्वीर में साफ देखा जा सकता है, टू-लेन और फोर-लेन सड़कों पर प्राइवेट लग्जरी बसें, ऑटो, लोडर गाड़ियां और कारों की लंबी कतारें एक-दूसरे से पूरी तरह सटकर खड़ी हैं। गाड़ियों के बीच पैदल निकलने तक की जगह नहीं बची है।
सबसे ज्यादा बदतर हालात गोवर्धन-बरसाना मार्ग और गोवर्धन चौराहे पर देखने को मिले। गिरिराज महाराज के दर्शन और परिक्रमा कर लौट रहे श्रद्धालुओं के वाहन जब नेशनल हाईवे की तरफ बढ़े, तो छटीकरा और चौमुहां अंडरपास पर पहले से मौजूद भारी वाहनों की कतारों में फंस गए। हाईवे के किनारे बने संकरे रास्तों और अंडरपासों पर घंटों गाड़ियां रेंगती रहीं, जिससे गाड़ियों में बैठे बच्चे और बुजुर्ग पानी के लिए तड़प उठे।
मथुरा नगर की भौगोलिक सीमा के भीतर ऐसा कोई भी कोना नहीं बचा, जहां सुगम यातायात मिल सके। स्थानीय प्रशासन के ढीले रवैये के कारण निम्नलिखित इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित रहे।
कोतवाली रोड, आर्यसमाज रोड और डीगगेट मार्ग।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान मुख्य मार्ग और भूतेश्वर तिराहा।
स्टेट बैंक से नया बस अड्डा, पुराना बस अड्डा और कृष्णानगर।
वृंदावनगेट, मंडी चौराहा, टाउनशिप और गोकुल रेस्टोरेंट चौराहा।
इस महाजाम का गहराई से विश्लेषण करने पर तीन प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं। पहला, शहर में बिना किसी रूट निर्धारण के दौड़ रहे हजारों अवैध ई-रिक्शा, जो कहीं भी आड़े-तिरछे खड़े हो जाते हैं। दूसरा, पीडब्ल्यूडी और नगर निगम द्वारा बिना किसी पूर्व योजना और डायवर्जन के मुख्य सड़कों पर शुरू कर दिया गया पैचवर्क और निर्माण कार्य। और तीसरा, श्रद्धालुओं की बेकाबू भीड़ जिसके सामने मुस्तैद पुलिसकर्मी और यातायात पुलिस के जवान पूरी तरह से असहाय और नाकाम साबित हुए। यदि वीकेंड और त्योहारों पर यही आलम रहा, तो आने वाले दिनों में मथुरा का पर्यटन उद्योग बुरी तरह प्रभावित होना तय है।