साइबर अपराध पर कड़ा प्रहार
एडीजी रमित शर्मा की जोनल वर्कशॉप: साइबर ठगी पर तकनीकी हथियार, फर्जी सिम-खाते पर अभियान, DIG पवन कुमार ने OSINT-डाटा एनालिसिस पर जोर।
➡️ एडीजी रमित शर्मा: तकनीक ही साइबर अपराध का सबसे बड़ा हथियार
➡️ DIG पवन कुमार: OSINT, डाटा एनालिसिस से फर्जी सिम-खाते बेनकाब
➡️ DIG अजय साहनी: अंतरराज्यीय साइबर मॉड्यूल पर संयुक्त अभियान
➡️ SSP अनुराग आर्य का प्रेजेंटेशन: त्वरित FIR, IMEI ब्लॉकिंग पर जोर
➡️ 1930 हेल्पलाइन को इमरजेंसी जैसा महत्व, जागरूकता अभियान तेज
➡️ साइबर स्लेवरी ट्रेंड पर चेतावनी, बैंक-टेलीकॉम को योद्धा बनाओ
तकनीकी दक्षता बनेगी पुलिस का नया हथियार एडीजी रमित शर्मा ने जोन स्तरीय वर्कशॉप में दी रणनीतिक दिशा
जन माध्यम
बरेली। गुरुवार का दिन डिजिटल युग का विस्तार जितनी तेजी से समाज को नई संभावनाएँ दे रहा है, उतनी ही तीव्रता से अपराधियों को भी नए हथियार उपलब्ध करा रहा है। साइबर अपराध आज एक अदृश्य, बिन सीमाओं वाली चुनौती बन चुका है जो रातों रात किसी किसान की बचत, किसी शिक्षिका की पेंशन या किसी युवा की मेहनत की कमाई को उड़ा ले जाता है। इस चुनौती के इसी बदलते स्वरूप को देखते हुए बरेली पुलिस लाइन स्थित रविन्द्रालय सभागार में गुरुवार को पूरे बरेली जोन की एक महत्त्वपूर्ण साइबर रणनीति कार्यशाला आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता एडीजी जोन रमित शर्मा ने की। यह सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि साइबर अपराध से जंग की नई रूपरेखा तय करने वाला गंभीर विमर्श रहा जहाँ पुलिस के श्रेष्ठ अधिकारी एक ही मकसद से इकट्ठा हुए डिजिटल ठगी के शिकंजे में फँसने से पहले पीड़ित को बचाना और अपराधी को तकनीक की रौशनी में बेनकाब करना।
एडीजीl रमित शर्मा ने अपने उद्बोधन में साफ कहा कि आज साइबर अपराध जिले, रेंज या राज्य की सीमाओं में कैद नहीं हैं। अपराधी फर्जी सिम, फर्जी बैंक खातों, वर्चुअल नंबरों, डिजिटल वॉलेट और सोशल मीडिया के दुरुपयोग से पूरे देश को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में पुलिस की कार्य शैली भी पारंपरिक दायरे से आगे बढ़नी ही होगी।
एडीजी ने कहा साइबर अपराधियों का मुकाबला केवल बल, दबाव या पारंपरिक पुलिसिंग से नहीं होगा। तकनीक में दक्षता ही अब पुलिस का सबसे बड़ा हथियार बनेगी।
एडीजी ने 1930 हेल्पलाइन को साइबर अपराधियों पर पहला वार बताते हुए कहा कि हर शिकायत को इमरजेंसी की तरह लिया जाए। पीड़ित की रकम ब्लॉक कराने के लिए सेकेंड्स की देर भी उसके लिए वर्षों की कमाई पर भारी पड़ सकती है। कार्यशाला में डीआईजी साइबर क्राइम पवन कुमार ने जिलों से मिले आंकड़ों और रिपोर्ट्स की गहन समीक्षा करते हुए स्पष्ट कहा कि साइबर सेल में मौजूद सभी डिजिटल टूल्स का पूरा उपयोग जरूरी है। उन्होंने ओपन सोर्स इंटेलिजेंस, डाटा एनालिसिस, सोशल मीडिया मैपिंग, डिजिटल फुटप्रिंटिंग और बैंकिंग फ्रॉड पैटर्न्स पर विस्तार से बात करते हुए पुलिस टीमों को नए तकनीकी तरीकों पर प्रशिक्षित होने की जरूरत बताई।
डीआईजी पवन कुमार ने कहा
अगर किसी जिले में तकनीकी दक्षता कम है तो तुरंत प्रशिक्षण दिया जाए। साइबर अपराध का मुकाबला सिर्फ तेज़ दिमाग से नहीं, तेज़ तकनीक से भी होगा।
उन्होंने जनता को जागरूक बनाने को साइबर सुरक्षा का सबसे मजबूत कवच बताते हुए कहा कि
जब तक जनता नहीं जागेगी, अपराधी नई तरकीबें गढ़ते रहेंगे।स्कूल कॉलेज, बैंक, संस्थाएँ, बाजार और ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान तेज करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।डीआईजी अजय कुमार साहनी ने कहा फर्जी सिम, फर्जी बैंक खाते और संदिग्ध वॉलेट पर चलेगा विशेष अभियान
डीआईजी बरेली रेंज ने साइबर अपराध की जड़ों पर चोट करने वाली नई रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि कई राज्यों के गुर्गे फर्जी सिम और फर्जी बैंक खातों के जरिए उत्तर भारत में बड़े पैमाने पर ठगी को अंजाम दे रहे हैं। इन पर संयुक्त अभियान चलाकर सख्त कार्यवाही का समय आ गया है।फर्जी सिम कार्ड की पहचान,
फर्जी बैंक खातों की स्क्रूटनी,
संदिग्ध डिजिटल वॉलेट की निगरानी,अंतरराज्यीय साइबर मॉड्यूल्स की प्रोफाइलिंग,
एनसीआरपी पोर्टल की लंबित शिकायतों का त्वरित निस्तारण,
सब पर समानांतर कार्रवाई की जाए।डीआईजी अजय साहनी ने साइबर स्लेवरी को एक खतरनाक उभरता ट्रेंड बताते हुए बताया कि पड़ोसी देशों में बैठा संगठित रैकेट युवाओं को रोजगार के नाम पर फंसा कर ठगी करवाता है। यह कुटिल जाल केवल तकनीक से ही काटा जा सकता है। इस दौरान डीआईजी मुरादाबाद मुनिराज जी भी वर्चुअल माध्यम से जुड़कर साइबर फ्रॉड से बचने के महत्वपूर्ण टिप्स साझा किए। एसएसपी बरेली व एसपी रामपुर जमीनी हकीकत को रखकर सजाई प्रभावी रणनीति
कार्यशाला के सबसे महत्त्वपूर्ण सत्रों में से एक रहा एसएसपी अनुराग आर्य और एसपी रामपुर विद्या सागर मिश्र द्वारा दिया गया विशेष प्रेजेंटेशन, जिसमें उन्होंने पूरे जोन की साइबर टीमों को यह समझाया कि किस प्रकार समय पर आफआईआर,IMEI और नंबर ब्लॉकिंग,बैंक से तत्काल लियन,
डिजिटल साक्ष्यों का त्वरित संरक्षण,
और टीमों के बीच समन्वय,
साइबर अपराध को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
उनके प्रेजेंटेशन में कई ऐसे केस स्टडी शामिल थे, जहाँ त्वरित कार्रवाई ने पीड़ित की लाखों की रकम बचा ली और जहाँ देर होने पर अपराधी डिजिटल सुरंगों में गायब हो गए। जोन भर की साइबर टीमें जुटीं181 थानों तक फैला नेटवर्क
कार्यशाला में उपस्थित रहे
साइबर नोडल अधिकारी
साइबर थानों के प्रभारी
जनपदीय साइबर सेल टीमें
181 थानों के साइबर हेल्पडेस्क प्रभारी यह दृश्य खुद इस बात का प्रमाण था कि बरेली जोन ने साइबर अपराध को एक बड़ी चुनौती मानते हुए अब हर स्तर पर रणनीति तैयार कर ली है। एडीजी ने कहा यह साझा लड़ाई है, हर संस्था को साथ आना होगा कार्यशाला के समापन पर एडीजी रमित शर्मा ने एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही
साइबर अपराध से लड़ाई अकेले पुलिस की नहीं है। बैंकिंग संस्थान, दूरसंचार कंपनियाँ, एनपीसीआई, फिनटेक प्लेटफॉर्म और हर डिजिटल एजेंसी इस युद्ध के योद्धा हैं। जब सब एक ही दिशा में चलेंगे, तभी यह लड़ाई जीती जाएगी।
उनके इन शब्दों में न सिर्फ चेतावनी थी, बल्कि उम्मीद भी उम्मीद कि तकनीक का दुरुपयोग करने वाले अपराधियों को तकनीक की ही ताकत से जवाब दिया जा सकता है और दिया जाएगा।