बीच रास्ते उतारने पर रोडवेज दोषी
बरेली उपभोक्ता आयोग ने रोडवेज को सेवा में कमी का दोषी ठहराया। बीच रास्ते उतारे गए यात्री को 25,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश।
बस से पहले उतारने पर रोडवेज को दोषी ठहराया गया
यात्री अंत्येष्टि में समय पर नहीं पहुंच सका
आयोग ने 25,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया
निर्णय से यात्रियों के अधिकारों को मिला बल
हसीन दानिश । जन माध्यम
बरेली। सफर भरोसे से शुरू होता है… लेकिन जब वही भरोसा रास्ते में उतार दिया जाए, तो सिर्फ दूरी नहीं, विश्वास भी टूट जाता है।
यात्री को बीच रास्ते उतारना पड़ा भारी
उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने एक अहम फैसले में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। आयोग ने साफ कहा कि बस परिचालक द्वारा यात्री को निर्धारित बस स्टैंड से पहले उतारना गंभीर लापरवाही है। यह फैसला उन यात्रियों के लिए राहत की खबर है, जो अक्सर ऐसी परेशानियों का सामना करते हैं लेकिन आवाज नहीं उठा पाते।
अंत्येष्टि में नहीं पहुंच सके यात्री
मामले के अनुसार, बरेली निवासी अब्दुल सत्तार 2 जून 2024 को रोडवेज बस से पीलीभीत जा रहे थे। उन्होंने विधिवत टिकट लिया था, लेकिन उन्हें बस स्टैंड से करीब 2 किलोमीटर पहले आसाम चौराहे पर उतार दिया गया। तेज गर्मी में करीब 45 मिनट तक इंतजार करने के बावजूद उन्हें कोई वाहन नहीं मिला, जिससे वे अपने रिश्तेदार की अंत्येष्टि में समय पर शामिल नहीं हो सके। यह सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि भावनात्मक क्षति भी है।
निगम का तर्क पड़ा कमजोर
परिवहन निगम ने अपने बचाव में रूट डायवर्जन का हवाला दिया, लेकिन सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में यह दावा गलत साबित हुआ। इससे साफ हो गया कि निगम की ओर से लापरवाही हुई थी। यहां तक कि बस परिचालक पर विभागीय कार्रवाई करते हुए वेतन से 200 रुपये काटे गए, जो गलती का प्रमाण है।
मुआवजा और सख्त संदेश
आयोग ने ‘विकेरियस लाइबिलिटी’ के सिद्धांत के तहत निगम को जिम्मेदार ठहराते हुए 15,000 रुपये मुआवजा और 10,000 रुपये वाद खर्च देने का आदेश दिया। साथ ही 45 दिनों में भुगतान न होने पर 6% वार्षिक ब्याज देने के निर्देश भी दिए गए। हालांकि 81 रुपये के किराये की वापसी को खारिज कर दिया गया। यह फैसला साफ संदेश देता है अब यात्रियों के अधिकारों के साथ लापरवाही महंगी पड़ेगी।