लखनऊ अग्निकांड के बाद जागा BDA: दो होटल सील, कोचिंग सेंटरों पर छापा, मॉल प्रबंधन को लगी फटकार
लखनऊ अग्निकांड के बाद बरेली में बीडीए, फायर विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने जांच अभियान चलाकर दो होटलों को सील किया। कई कोचिंग सेंटरों और व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा खामियां मिलीं।
बीडीए की संयुक्त टीम ने शहरभर में सुरक्षा जांच अभियान चलाया।
रजनी होटल और सेटेलाइट होटल को तत्काल सील किया गया।
कोचिंग सेंटरों, मॉल और व्यावसायिक भवनों में कई खामियां मिलीं।
जन माध्यम
बरेली। लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने शहर में बड़े स्तर पर सुरक्षा जांच अभियान चलाया। सोमवार को बीडीए उपाध्यक्ष सौम्या पांडेय के नेतृत्व में फायर विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने कोचिंग सेंटरों, होटलों, मॉल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान सेटेलाइट रोड स्थित रजनी होटल और सेटेलाइट होटल को तत्काल सील कर दिया गया।
संयुक्त टीम ने सबसे पहले रघुवंशी कॉम्प्लेक्स स्थित विद्यापीठ कोचिंग सेंटर का निरीक्षण किया। इसके बाद चौकी चौराहा स्थित रतनदीप कॉम्प्लेक्स में संचालित आकाश कोचिंग सेंटर की फायर सेफ्टी, इमरजेंसी एग्जिट और भवन सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की गई।
रविवार को सिटी सेंटर एलए मॉल की लिफ्ट में लोगों के फंसने की घटना के बाद टीम ने मॉल का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बीडीए उपाध्यक्ष ने मॉल प्रबंधन से लिफ्ट संचालन व्यवस्था को लेकर जवाब तलब किया और सुरक्षा मानकों में लापरवाही पर नाराजगी जताई।
जांच के दौरान कई भवनों में फायर एक्सटिंग्विशर अधूरे मिले। कुछ स्थानों पर स्प्रिंकलर सिस्टम नहीं था, जबकि कई संस्थानों में इलेक्ट्रिकल सेफ्टी मानकों का पालन नहीं पाया गया। कुछ कोचिंग सेंटरों में आपात स्थिति के दौरान छात्रों की सुरक्षित निकासी के लिए पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं मिली।
निरीक्षण में जिन संस्थानों के पास वैध फायर एनओसी नहीं पाई गई या उसकी अवधि समाप्त हो चुकी थी, उन्हें निर्धारित समय में सभी कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि निर्देशों का पालन न करने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शहर में हुई इस कार्रवाई के बाद सुरक्षा मानकों को लेकर प्रशासन की सक्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है। वहीं आम लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि नियमित निरीक्षण पहले से होते रहते, तो कई खामियां पहले ही दूर कराई जा सकती थीं।