कैशलेस चिकित्सा सुविधा से वंचित शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में रोष, आंदोलन की चेतावनी

बरेली में शिक्षणेत्तर कर्मचारी संयुक्त परिषद ने अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षणेत्तर एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा योजना में शामिल करने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

कैशलेस चिकित्सा सुविधा से वंचित शिक्षणेत्तर कर्मचारियों में रोष, आंदोलन की चेतावनी
HIGHLIGHTS:

• शिक्षणेत्तर कर्मचारी संयुक्त परिषद ने मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन।

• अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षणेत्तर एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को योजना में शामिल करने की मांग।

• मांग पूरी न होने पर चरणबद्ध आंदोलन और धरना-प्रदर्शन की चेतावनी।

जन माध्यम
बरेली। 
अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा से बाहर रखे जाने के विरोध में शिक्षणेत्तर कर्मचारी संयुक्त परिषद ने मुख्यमंत्री के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजा। परिषद ने शिक्षणेत्तर एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी इस योजना का लाभ देने की मांग करते हुए सरकार से शीघ्र शासनादेश जारी करने की अपील की।

परिषद के जिलाध्यक्ष हरी शंकर ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना स्वागत योग्य कदम है, लेकिन उसी संस्थान में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को इससे वंचित रखना भेदभावपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों के सुचारु संचालन में शिक्षकों के साथ शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए दोनों को समान सुविधाएं मिलनी चाहिए।

उन्होंने बताया कि बीमारी अथवा आकस्मिक परिस्थितियों में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को उपचार के लिए अपनी जमा-पूंजी खर्च करनी पड़ती है या फिर कर्ज का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में सरकार यदि कर्मचारियों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति गंभीर है तो कैशलेस चिकित्सा योजना का लाभ सभी पात्र कर्मचारियों तक समान रूप से पहुंचाया जाना चाहिए।

ज्ञापन में मांग की गई कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत सभी शिक्षणेत्तर एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी कैशलेस चिकित्सा योजना के दायरे में शामिल किया जाए और इस संबंध में जल्द शासनादेश जारी किया जाए।

जिलाध्यक्ष हरी शंकर ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो शिक्षणेत्तर कर्मचारी संयुक्त परिषद प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगी। इसके तहत ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और अन्य लोकतांत्रिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।