डिजिटल अंधेरे में भरोसे की वर्दी
बरेली रेंज में डीआईजी अजय कुमार साहनी के नेतृत्व में साइबर ठगी के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया। फर्जी कॉल सेंटर, फर्जी सिम और बैंक खातों पर कार्रवाई कर ठगों की रीढ़ तोड़ी गई और आम लोगों का भरोसा लौटाया गया।
➡️ डीआईजी अजय कुमार साहनी के नेतृत्व में बड़ा साइबर अभियान
➡️ फर्जी कॉल सेंटर और फर्जी सिम नेटवर्क पर सर्जिकल कार्रवाई
➡️ शाहजहांपुर, पीलीभीत, बरेली और बदायूं में एक साथ छापे
➡️ दुबई में बैठे सरगना तक पहुंची जांच
➡️ फर्जी सिम बेचने वालों पर भी मुकदमे दर्ज
➡️ 1930 हेल्पलाइन और साइबर पोर्टल से पीड़ितों को राहत
डेस्क/ जन माध्यम
बरेली। एक अनजान कॉल,एक चमकता हुआ लिंक,और पल भर में किसी की जीवन भर की कमाई हवा हो जाती है। कई घरों में उस दिन चूल्हा नहीं जलता, कई आंखों की नींद हमेशा के लिए खो जाती है। साइबर ठगी सिर्फ पैसे की चोरी नहीं होती, यह भरोसे, सपनों और आत्मसम्मान की लूट होती है। ऐसे अंधेरे समय में जब कोई वर्दी आम आदमी के दर्द को समझते हुए उसके सामने ढाल बनकर खड़ी हो जाए, तो वह अफसर नहीं, उम्मीद बन जाता है। डीआईजी अजय कुमार साहनी ने यही करके दिखाया है। डीआईजी के नेतृत्व में शाहजहांपुर, पीलीभीत, बरेली और बदायूं में चला साइबर अपराध विरोधी अभियान सिर्फ कार्रवाई नहीं था, यह उन हजारों लोगों के लिए जवाब था जो ठगे जाने के बाद खुद को अकेला समझने लगते हैं। स्टॉक मार्केट, गेमिंग ऐप और साइबर गुलामी के नाम पर चल रहे ठगी के साम्राज्य पर जिस सटीकता और संवेदनशीलता से कार्रवाई हुई है, उसने साबित कर दिया कि कानून आज भी आम आदमी के साथ खड़ा है। फर्जी कॉल सेंटर, किराये के बैंक खाते, झूठे मुनाफे के सपने और फर्जी सिम कार्ड इन सबके पीछे छिपे चेहरे अब बेनकाब हैं। शाहजहांपुर के जलालाबाद से लेकर पीलीभीत के गांवों तक फैला जाल एक एक कर टूटता चला गया। दुबई तक बैठे सरगना की गिरफ्तारी ने यह संदेश दे दिया कि अपराधी चाहे दुनिया के किसी भी कोने में छिपा हो, कानून की नजर से बच नहीं सकता। इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी खूबसूरती यह रही कि करवाई सिर्फ ठगों पर नहीं, बल्कि उस जड़ पर की गई है,जिसने ठगी को जन्म दिया। डीआईजी के निर्देश पर फर्जी दस्तावेजों पर सिम बेचने वालों पर भी मुकदमे दर्ज किए गए। बरेली में अब तक आठ मुकदमे दर्ज होना इस बात का प्रमाण है कि अब ठगों की सांसों तक पहुंचने वाला रास्ता बंद किया जा रहा है। जब सिम नहीं मिलेगा, तो ठगी भी नहीं पनपेगी यह सोच ही एक दूरदर्शी नेतृत्व की पहचान है। पुलिस द्वारा बरामद किए गए लैपटॉप, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और बैंक दस्तावेज सिर्फ सामान नहीं हैं, वे उन टूटी उम्मीदों की कहानी बयान करते हैं, जिन्हें ठगों ने बेरहमी से कुचला। हर जब्त किया गया उपकरण किसी न किसी पीड़ित की आह को शांत करने की कोशिश है। डीआईजी अजय कुमार साहनी लोगों से अपील की है, लालच, लिंक और अनजान कॉल से दूर रहें। यह चेतावनी नहीं, एक बेहतरीन अधिकारी की तरह दी गई सलाह है। वे चाहते हैं कि कोई और परिवार उस पीड़ा से न गुजरे, जिससे हजारों लोग गुजर चुके हैं। 1930 हेल्पलाइन और साइबर पोर्टल की जानकारी देना यह बताता है कि पुलिस सिर्फ अपराधियों को पकड़ती नहीं, पीड़ित का हाथ भी थामती है। रेंज में यह अभियान भरोसे की वापसी है। यह एहसास है कि अगर किसी की मेहनत की कमाई डूब भी जाए, तो उसकी आवाज सुनने वाला कोई न कोई जरूर है। डीआईजी अजय कुमार साहनी ने साबित कर दिया कि वर्दी अगर संवेदनशील हो, तो वह सिर्फ कानून का प्रतीक नहीं रहती वह आम आदमी के आंसुओं को पोंछने वाली उम्मीद बन जाती है।