इल्म ओ अदब और सहाफत का रौशन चेहरा हैं खान सरफराज सैंथली: एडवोकेट काजी उवैस

बरेली के कस्बा सैंथल के मशहूर उर्दू शायर, पत्रकार और वक्ता खान सरफराज सैंथली के बहुआयामी व्यक्तित्व और उनकी साहित्यिक सेवाओं पर एडवोकेट काजी उवैस अहमद के विचार।

इल्म ओ अदब और सहाफत का रौशन चेहरा हैं खान सरफराज सैंथली: एडवोकेट काजी उवैस
मशहूर उर्दू शायर और पत्रकार खान सरफराज सैंथली की फाइल फोटो।
HIGHLIGHTS:

बहुआयामी व्यक्तित्व: खान सरफराज सैंथली को एक बेहतरीन उर्दू शायर, निष्पक्ष पत्रकार (सहाफी) और असरदार वक्ता के रूप में जाना जाता है।

गहवारा-ए-अदब सैंथल: वसीम बरेलवी और मुन्तक़िम हैदरी जैसी महान शख्सियतों की इस सरजमीं पर खान सरफराज ने अदबी दुनिया में खास पहचान बनाई।

प्रेरणास्रोत: सामाजिक मुद्दों, शिक्षा और इंसाफ पर उनकी सकारात्मक सोच और लेखन नई पीढ़ी के लिए एक मिसाल है।

सैंथल (बरेली)। उत्तर प्रदेश की सरजमीं हमेशा से इल्म ओ अदब और तहजीब की अमानतदार रही है। इसी प्रदेश के बरेली शहर का एक कस्बा सैंथल है, जिसे 'गहवारा-ए-अदब' के नाम से जाना जाता है। विश्व प्रसिद्ध शायर वसीम बरेलवी ने शायरी का ककहरा यहीं से सीखा और उनके उस्ताद-ए-मोहतरम जनाब मुन्तक़िम हैदरी जैसे नायाब हीरे को इसी सैंथल ने पैदा किया। इसी मशहूर अदबी सरजमीं पर खान सरफराज सैंथली ने भी आंख खोली और आज वे इल्म ओ अदब और सहाफत (पत्रकारिता) का एक रौशन चेहरा बन चुके हैं।

शायरी में समाजी मसायल और इंसानी जज्बात का संगम
एडवोकेट काजी उवैस अहमद के मुताबिक, खान सरफराज सैंथली का व्यक्तित्व बहुआयामी है। उन्होंने अपनी शायरी के जरिए इंसानी जज्बात, समाजी मसायल और तहज़ीबी मूल्यों को बड़ी खूबसूरती से पेश किया है। उनकी ग़ज़लों में जिंदगी की हकीकत, मोहब्बत की नर्मी, इंसानियत का दर्द और समाज की बेहतरी का पैगाम साफ झलकता है। उनकी जुबान सरल होने के बावजूद बेहद असरदार है, जो आम लोगों के दिल तक सीधी पहुंचती है।

सहाफत और तकरीर में दिखाई देती है संवेदनशीलता
सहाफत (पत्रकारिता) के मैदान में भी खान सरफराज ने हमेशा ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी का सुबूत पेश किया है। उन्होंने पत्रकारिता को सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज उठाने का माध्यम समझा है। शिक्षा, इंसाफ और इंसानी हमदर्दी से जुड़े विषयों पर उनका लेखन हमेशा जागरूक करने वाला रहा है। इसके साथ ही, एक अच्छे वक्ता के रूप में उनकी तकरीर (भाषण) में ज्ञान, अनुभव और समाज के प्रति संवेदनशीलता साफ दिखाई देती है।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत
खान सरफराज सैंथली का व्यक्तित्व नई पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्रोत है। उन्होंने यह साबित किया है कि अगर इंसान के अंदर इल्म का नूर, अदब का एहतराम और समाज सेवा का जज्बा हो, तो वह अपने फन के जरिए लोगों के दिलों में स्थाई जगह बना सकता है। आज उर्दू अदब और पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका नाम बेहद सम्मान से लिया जाता है।

खान सरफराज सैंथली की एक गजल बानगी के तौर पर:
हंस रहा था मगर उदास था वो,
किस कदर जिंदगी शनास था वो।

मैं सुलगते लबों का पैकर था,
सर्द पानी का इक गिलास था वो।

मेरा लहजा था शेर थे उसके,
मुज़्तरिब रूह का लिवास था वो।

रूठकर जो चला गया मुझसे,
आरजू जिंदगी की आस था वो।

फासले सरफराज थे दिल में,
यूं तो होने को मेरे पास था वो।