सैंथल का गंगापुर मोहल्ला
बरेली की सबसे पुरानी नगर पंचायत सैंथल में गंगापुर मोहल्ला और खेड़ा टीला, बुजुर्गों का दावा: यहाँ से बहती थी गंगा, शोध का विषय।
➡️ सैंथल: बरेली की सबसे पुरानी नगर पंचायत
➡️ गंगापुर मोहल्ला: बुजुर्गों का दावा – यहाँ बहती थी गंगा
➡️ खेड़ा टीला अब कब्रिस्तान, कभी गंगा का रास्ता?
➡️ इतिहासकार बोले: यहाँ सिर्फ रामगंगा बहती है
➡️ गंगा का बहाव सैंथल में आज भी शोध का विषय
➡️ सैंथल की संस्कृति और विरासत आज भी जीवंत
पुरानी आस्था और इतिहास की झलक, खोज का विषय बना गंगा का बहाव
जन माध्यम
सैंथल। बरेली मंडल की सबसे पुरानी नगर पंचायतों में से एक सैंथल का इतिहास और संस्कृति जिले में इसे विशेष पहचान देती है। यहां के बुजुर्ग बताते हैं कि पुराने समय में गंगा नदी की पतित पावनी धाराएँ इसी क्षेत्र से होकर बहती थीं। इसी संदर्भ में तहसील नबाबगंज के सैंथल में गंगापुर नामक मोहल्ला भी आबाद था, जो आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है। सैंथल में एक ऊँचा टीला है जिसे खेड़ा कहा जाता है। आज यह टीला कब्रिस्तान का रूप ले चुका है, लेकिन कहा जाता है कि यहीं से होकर प्राचीन काल में माँ गंगा बहती थी। हालांकि इतिहासकारों का तर्क कुछ अलग है। उनके अनुसार जिले में गंगा नहीं बल्कि रामगंगा नदी बहती है, जिसका संगम शाहजहांपुर के जलालाबाद से आगे जाकर फर्रुखाबाद के पास गंगा नदी में होता है। ऐतिहासिक किताबों में सैंथल के पास गंगा नदी बहने का उल्लेख नहीं मिलता, इसलिए यह विषय शोध और खोज का केंद्र बना हुआ है। सैंथल नगर पंचायत न केवल अपनी प्राचीनता के लिए बल्कि यहां के लोगों, संस्कृति और सामाजिक परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। यहां की प्रतिभाएँ देश के कोने-कोने में अपनी योग्यता और क्षमता से सैंथल को गौरवान्वित कर रही हैं। गंगापुर मोहल्ले की आस्था, खेड़ा टीले की कहानियाँ और सैंथल की सांस्कृतिक धरोहर मिलकर इस नगर पंचायत को बरेली जिले के नक्शे पर एक विशिष्ट स्थान प्रदान करती हैं। शोधकर्ताओं और इतिहास प्रेमियों के लिए यह क्षेत्र हमेशा आकर्षण का केंद्र रहेगा, जहां पुरानी कथाएँ, नदी की धाराएँ और स्थानीय विरासत एक साथ इतिहास के पन्नों में जीवंत होती हैं।