अंगीठी बनी काल, बुज़ुर्ग दंपती की दर्दनाक मौत
बरेली के प्रेमनगर में बंद कमरे में अंगीठी जलाने से 98 वर्षीय रिटायर्ड बीडीओ और उनकी पत्नी की दम घुटने से दर्दनाक मौत हो गई। वेंटिलेशन की कमी हादसे की मुख्य वजह बताई जा रही है।
➡️ प्रेमनगर में दर्दनाक हादसा
➡️ 98 वर्षीय रिटायर्ड बीडीओ व पत्नी की मौत
➡️ बंद कमरे में जल रही थी अंगीठी
➡️ वेंटिलेशन नहीं होने से घुटा दम
हसीन दानिश / जन माध्यम
बरेली। जिले के प्रेमनगर थाना क्षेत्र से एक हृदयविदारक हादसा सामने आया है, जहां राजेंद्रनगर निवासी 98 वर्षीय रिटायर्ड बीडीओ उमा शंकर सक्सेना और उनकी 78 वर्षीय पत्नी कामिनी देवी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में दोनों की मौत का कारण अंगीठी से निकला जहरीला धुआं और दम घुटना बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार उमा शंकर सक्सेना और उनकी पत्नी ठंड से बचने के लिए अपने कमरे में अंगीठी जलाकर सो गए थे। सुबह के समय जब कमरे से धुआं निकलता देखा गया तो घर में अफरा-तफरी मच गई। पोते द्वारा शोर मचाने पर परिजन पहली मंजिल पर पहुंचे, जहां उमा शंकर सक्सेना झुलसी अवस्था में मिले, जबकि उनकी पत्नी बिस्तर पर बेहोशी की हालत में पड़ी थीं।
परिजनों द्वारा तत्काल डॉक्टरों को बुलाया गया, लेकिन जांच के बाद चिकित्सकों ने दोनों को मौके पर ही मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक कमरे में वेंटिलेशन की भारी कमी थी और अंगीठी लगातार जलती रहने से ऑक्सीजन समाप्त हो गई, जिससे जहरीले धुएं ने दोनों की जान ले ली।
उमा शंकर सक्सेना कृषि विभाग में बीडीओ पद से सेवानिवृत्त थे। उनके चार बेटे थे, जिनमें से दो का पहले ही निधन हो चुका है। जीवित बेटों में आलोक कुमार सक्सेना चिकित्सक हैं, जबकि नवीन सक्सेना व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। इस हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
घटना की सूचना मिलते ही मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई। आसपास के लोग स्तब्ध हैं कि एक ही परिवार में इस तरह का हादसा हो गया। वहीं क्षेत्रीय थाना पुलिस का कहना है कि इस घटना की औपचारिक सूचना परिजनों द्वारा पुलिस को नहीं दी गई है।
यह दर्दनाक घटना ठंड के मौसम में अंगीठी और हीटर के इस्तेमाल को लेकर एक गंभीर चेतावनी भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि बंद कमरों में अंगीठी या कोयले का प्रयोग जानलेवा साबित हो सकता है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार जागरूकता के बावजूद ऐसे हादसे यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या लोग अब भी खतरे को समझने से चूक रहे हैं।