बरेली जिला अस्पताल: मरीज आए थे इलाज कराने, लुटकर चले गए

बरेली जिला अस्पताल में महिला का 3500 रुपये, मोबाइल, कागजात चोरी। सीसीटीवी खराब, गार्ड गायब, स्टाफ बेपरवाह। मरीज बोले - इलाज के लिए आए थे, लुटकर गए!

बरेली जिला अस्पताल: मरीज आए थे इलाज कराने, लुटकर चले गए
HIGHLIGHTS:

➡️ एक्स-रे कराने आई पुष्पा देवी का पर्स-मोबाइल चोरी
➡️ पर्स में 3500 रुपये नकद और जरूरी कागजात गायब
➡️ सीसीटीवी या तो खराब या गलत दिशा में, कुछ कैद नहीं हुआ
➡️ कोई सुरक्षाकर्मी नहीं पहुंचा, स्टाफ ने भी मुंह फेर लिया
➡️ महिला बिना रिपोर्ट लिए रोते-बिलखते घर लौटी
➡️ पिछले कुछ महीनों में दर्जनों चोरी की शिकायतें, कोई कार्रवाई नहीं
➡️ मरीज बोले - अब अस्पताल आने से भी डर लगता है

जन माध्यम/ जन माध्यम

बरेली। मरीजों का सबसे बड़ा सहारा कहे जाने वाले जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर पूरी तरह बेनकाब हो गई। एक्स-रे कराने आई महिला का पर्स और मोबाइल दिनदहाड़े चोरी हो गया, लेकिन न तो कोई सुराग मिला, न सीसीटीवी ने कुछ कैद किया और न ही अस्पताल प्रशासन ने कोई जिम्मेदारी ली। सवाल यह है कि जिस अस्पताल में मरीज अपनी जान बचाने आते हैं, वहाँ उनकी जेब भी सुरक्षित नहीं, तो फिर भरोसा किस पर करें? घटना शनिवार की है। बिहारीपुर ढ़किया निवासी पुष्पा देवी एक्स-रे कराने जिला अस्पताल पहुंचीं। भीड़ इतनी थी कि उन्होंने अपना पर्स और मोबाइल बैग में रख लिया। एक्स-रे कराकर जब बाहर निकलीं और बैग खोला तो साँय से खाली! पर्स में 3,500 रुपये नकद, जरूरी कागजात और मोबाइल गायब। महिला ने एक्स-रे कक्ष में तुरंत शोर मचाया, लेकिन वहाँ लगा सीसीटीवी कैमरा या तो खराब था या उसका मुहँ किसी और तरफ था – कुछ भी कैद नहीं हुआ।सबसे शर्मनाक बात यह कि न तो कोई सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुँचा, न अस्पताल स्टाफ ने कोई सहयोग किया। हताश और रोते-बिलखते पुष्पा देवी बिना रिपोर्ट लिए ही घर लौट गईं। उनका कहना था, “पैसा तो गया सो गया, लेकिन अस्पताल में इस तरह चोरी होना बहुत डरावना है। अब बीमार पड़ने पर भी डर लगेगा कि कहीं और लुट न जाएँ।”यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ महीनों में जिला अस्पताल परिसर में मोबाइल, पर्स, जूते-चप्पल तक की चोरी की दर्जनों शिकायतें आ चुकी हैं, लेकिन न सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ी, न सीसीटीवी ठीक हुए और न ही चोरों पर कोई अंकुश लगा। आलम यह है कि चोर अस्पताल को अपना सबसे सुरक्षित अड्डा मानकर चल रहे हैं – आखिर मरीज और तीमारदार तो विरोध करने की हालत में भी नहीं होते।

प्रश्न सीधा है – करोड़ों रुपये की मशीनें और इमारतें चमकाने वाले जिला अस्पताल में दो-चार सुरक्षाकर्मी और काम करने वाले सीसीटीवी लगवाने की फुर्सत क्यों नहीं? जब तक प्रशासन जागेगा नहीं, तब तक बरेली का जिला अस्पताल मरीजों के लिए इलाज का केंद्र कम और ‘चोरों का अड्डा’ ज्यादा बना रहेगा।

क्या अब भी कोई जिम्मेदार अधिकारी जवाब देगा, या फिर अगली चोरी का इंतजार किया जाए?