कटाई की दहलीज पर पहुंचा धान, एक झटके में धराशायी

खेत बने तालाब, धान गन्ना भारी नुकसान दलहन तिलहन पर सड़न का साया, बारिश में बिछी किसानों की उम्मीद

कटाई की दहलीज पर पहुंचा धान, एक झटके में धराशायी
HIGHLIGHTS:

दो दिन की बारिश और तेज हवाओं से पकने के करीब पहुंची धान की फसल खेतों में गिर गई।

करीब 1.25 लाख हेक्टेयर गन्ने में भी तेज हवा से फसल गिरने की सूचनाएं सामने आईं।

कृषि विभाग सोमवार से गांवों में सर्वे कर नुकसान का आकलन करेगा, बीमित किसानों को 48 घंटे में सूचना देने की सलाह।

जन माध्यम 
बरेली।
आसमान से बरसी आफत ने खेतों में महीनों से पल रही किसानों की उम्मीदों को झुका दिया। दो दिन की बारिश और तेज हवाओं ने कहीं धान की सुनहरी बालियों को मिट्टी से मिला दिया तो कहीं गन्ने की खड़ी फसल खेत में बिछ गई। जिन खेतों में कुछ दिन बाद मेहनत की फसल घर आने वाली थी, वहां अब पानी का सन्नाटा पसरा है। खेत तालाब बन गए हैं और अन्नदाता की आंखों में चिंता उतर आई है।
शुक्रवार से शुरू हुई बारिश शनिवार और रविवार तक जारी रही। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश का सबसे गहरा असर पकने के करीब पहुंच चुके धान पर पड़ा। खेत में गिरी फसल में दाने की गुणवत्ता प्रभावित होने और सड़न का खतरा है। जिले में इस बार लगभग 1,58,627.44 हेक्टेयर में धान बोया गया है। यह वही फसल है, जिसके सहारे हजारों परिवारों की उम्मीदें बंधी हैं।
गन्ने की खड़ी फसल भी नहीं बची
करीब 1.25 लाख हेक्टेयर में खड़े गन्ने पर भी मौसम का कहर टूटा है। कई इलाकों में तेज हवा से गन्ना गिरने की सूचनाएं हैं। जिले के 5.44 लाख से अधिक किसान इस बारिश को बेबसी से देख रहे हैं। खेतों में खड़ी फसल का गिरना सिर्फ पौधों का झुकना नहीं, बल्कि किसान की महीनों की मेहनत पर पड़ा मौसम का भारी वार है।
उड़द, मूंग, तिल और सब्जियों के खेत भी जलभराव से जूझ रहे हैं। लगातार नमी रहने से फसलों में सड़न और फंगस का खतरा बढ़ गया है। खेतों से पानी न निकला तो नुकसान और गहरा सकता है।
अब गांव गांव नापी जाएगी बर्बादी
नुकसान की सूचनाओं के बाद कृषि विभाग ने विकासखंड स्तर पर सर्वे के निर्देश दिए हैं। सोमवार से टीमें गांवों में पहुंचकर खेतों की हकीकत दर्ज करेंगी। वास्तविक नुकसान सर्वे के बाद सामने आएगा।
48 घंटे में दें बीमा की सूचना
कृषि उपनिदेशक ओपी मिश्र ने फसल बीमा कराने वाले किसानों से नुकसान की सूचना 48 घंटे के भीतर देने को कहा है। किसानों को सलाह दी गई है कि जहां संभव हो, खेतों से पानी की निकासी तत्काल करें। मौसम की मार के बीच अब किसान की निगाह सिर्फ राहत और मुआयने पर टिकी है क्योंकि खेत में खड़ी फसल के साथ उसकी उम्मीद भी भीग रही है।