इत्तेहाद की गूंज में अकीदत का जलसा
सैंथल में ताजयति जलसा आयोजित, इत्तेहाद और खामनेई की शहादत पर चर्चा मुख्य विषय रहा।
इमामबाड़ा ए खुर्द में ताजयति जलसा आयोजित
खामनेई की शहादत पर पेश की गई अकीदत
अमेरिका और इज़राइल की हुई आलोचना
शिया सुन्नियों ने मिलकर दिया इत्तेहाद का संदेश
जन माध्यम
सेथल/बरेली। रात की खामोशी में जब इमामबाड़ा ए खुर्द रोशनी से जगमगा रहा था, तो हर आंख में अकीदत और हर दिल में इत्तेहाद की आवाज गूंज रही थी। कस्बा सैंथल में एक ताजयति जलसा आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत कर अपने जज्बात का इजहार किया।
इस जलसे का आयोजन ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामनेई की शहादत के सिलसिले में किया गया। कार्यक्रम में बरेली के मशहूर डॉक्टर शारिक सिद्दीकी, डॉक्टर अबूसईद, शायर हनीफ साहिल, मौलाना मुबीन हसन, मौलाना रियाज असकरी और आंबेडकर नगर से तशरीफ लाए मौलाना हैदर अब्बास नकवी समेत कई नामचीन हस्तियों ने अपने खिताब पेश किए।
जलसे में वक्ताओं ने रहबर ए मोअज्जम की शहादत पर विस्तार से रोशनी डाली और उन्हें खिराज ए अकीदत पेश की। वक्ताओं ने कहा कि उनकी कुर्बानी इंसानियत और मजहबी उसूलों की हिफाजत का प्रतीक है, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा।
अपने संबोधन में डॉक्टर अबूसईद ने कहा कि मौजूदा हालात में सबसे बड़ी जरूरत है कि लोग बिदार हों और हालात को समझें। उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें शिया और सुन्नी के बीच फूट डालकर मुस्लिम समाज को कमजोर करना चाहती हैं, लेकिन हमें इत्तेहाद के साथ उनकी इस साजिश को नाकाम करना होगा।
जलसे में अमेरिका और इज़राइल की नीतियों की भी जमकर आलोचना की गई। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मुस्लिम उम्मत को आपसी एकता के जरिए हर चुनौती का सामना करना चाहिए और किसी भी साजिश को कामयाब नहीं होने देना चाहिए।
इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि शिया और सुन्नी समुदाय के लोगों ने मिलकर इसमें हिस्सा लिया और इत्तेहाद की मजबूत मिसाल पेश की। यह एकता का संदेश पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना रहा।
जलसा देर रात तक चलता रहा, जिसमें लोगों ने पूरे जोश और अकीदत के साथ हिस्सा लिया और इत्तेहाद की इस आवाज को और बुलंद किया।