सैंथल में अदब से रंगीन हुई एक शाम

सैंथल में डॉ. हनीफ साहिल के क्लिनिक पर मुईन नवाबगंजवी का सम्मान, स्थानीय शायरों ने गजलें-नज्में पढ़कर रंग जमाया।

सैंथल में अदब से रंगीन हुई एक शाम
HIGHLIGHTS:

➡️ सैंथल में शायरी की रंगीन शाम
➡️ मुईन नवाबगंजवी का भावपूर्ण सम्मान
➡️ “तायरो उड़ान के बाद ज़मीं पे लौट के आना है”
➡️ हनीफ साहिल का दर्द भरा शेर: “यह मेरा सर तो मेरी बात पर गया यारो”
➡️ सरफराज खान ने सुनाया: “शिकस्ता दिल का मेरी आंख तू भरम रखना”
➡️ पूरी महफिल तालियों से गूंज उठी

सरफराज़ खान/ जन माध्यम
सैंथल,बरेली।
 मौका था उभरते हुए नौजवान शायर मुईन नवाबगंजवी के सम्मान का वह आज यहां डॉक्टर हनीफ साहिल के जर्राही मतब पर आए हुए थे लगे हाथों मकामी शायरों ने उनके सम्मान में एक शेरी नशिस्त का इनकाद भी कर लिया।इस नशिस्त का मौजूद लोगों ने खूब लुत्फ लिया।
मेहमान शायर ने एक सवाल के जवाब में कहा शायरी एक तरफ आईना है तो दूसरी तरफ यह दिलों को गुदगुदाने का काम भी करती है साथ ही मुआशरे में घटने वाले अच्छे बुरे हादसों से भी 
रूशनास कराती है।
अपनी बात को अमली जामा पहनाते हुए उन्होंने कुछ शेर भी नज़र किए।
यह बात याद रहे तायरो उड़ान के बाद
ज़मीं पे लौट के आना है आसमान के बाद
दिल समंदर है मेरा दर्द छुपाने वाला
होगा कमज़र्फ कोई शोर मचाने वाला
शायर हनीफ साहिल ने कहा।
तुम्हारे नेज़ो को खुद्दारियों से क्या निस्वात
यह मेरा सर तो मेरी बात पर गया यारो
सहाफी शाहटाइम खान सरफराज खान ने कहा
बस इक जरा सा मेरे हाल पर करम रखना
शिकस्ता दिल का मेरी आंख तू भरम रखना
मेरी अना की यह दीवार गिर न जाय कहीं
ऐ ज़र्फ़ ए तशनालबी मुझपे तू करम रखना
इसके अलावा अन्य शायरों ने भी अपने कलाम से महफिल को रंगीनियां बख्शी।