वृंदावन में पोस्टर विवाद, संत प्रेमानंद पर आपत्ति
वृंदावन में संत प्रेमानंद को बांकेबिहारी के रूप में दिखाने वाले पोस्टर पर विवाद, ब्राह्मण सभा ने जताई कड़ी आपत्ति और कार्रवाई की मांग।
संत प्रेमानंद को बांकेबिहारी के रूप में दिखाने वाला पोस्टर वायरल
ब्राह्मण सभा ने जताई कड़ी आपत्ति
परंपराओं के अपमान का लगाया आरोप
सरकार से कानूनी कार्रवाई की मांग
श्याम बिहारी भार्गव । जन माध्यम
मथुरा। आस्था की नगरी वृंदावन में एक पोस्टर ने ऐसा विवाद खड़ा कर दिया है, जिसने श्रद्धा और मर्यादा दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सोशल मीडिया पर लोकप्रियता की दौड़ अब धार्मिक सीमाएं भी लांघने लगी है?
वृंदावन में सोशल मीडिया पर एक विवादास्पद पोस्टर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें संत प्रेमानंद महाराज को ठाकुर श्रीबांकेबिहारीजी के रूप में चित्रित किया गया है। इस पोस्टर ने धार्मिक भावनाओं को भड़काते हुए नया विवाद खड़ा कर दिया है।
इस मामले पर अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण सभा ने कड़ी आपत्ति जताई है। सभा का कहना है कि यह कृत्य ब्रज की परंपराओं और आराध्य के स्वरूप का सीधा अपमान है, जिसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
ब्रज प्रदेश अध्यक्ष पंडित बिहारी लाल वशिष्ठ और महामंत्री राजेश पाठक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संत प्रेमानंद महाराज को साक्षात बिहारीजी के रूप में दिखाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि श्रीबांकेबिहारी ब्रज के आराध्य हैं और उनकी तुलना किसी भी संत से नहीं की जा सकती।
महासभा ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस पोस्टर की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही प्रेमानंद महाराज के प्रबंधन से भी अपील की गई है कि वे अपने अनुयायियों को इस तरह के कार्यों से दूर रहने के निर्देश दें, क्योंकि इससे संत की छवि को भी नुकसान पहुंच रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मामला और गंभीर हो गया है। ब्राह्मण महासभा ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ईश-निंदा विरोधी कानून बनाया जाए।
अब बड़ा सवाल यही है क्या सोशल मीडिया की आजादी के नाम पर धार्मिक आस्थाओं से खिलवाड़ किया जा सकता है, या फिर इस पर सख्त सीमा तय करने का वक्त आ चुका है?