महाबजट पर मेयर का सख्त सवाल
बरेली मेयर डॉ. उमेश गौतम ने बजट बैठक में अधिकारियों को लताड़ा, 15 दिसंबर तक हर वार्ड में 1 करोड़ का काम शुरू करने का अल्टीमेटम दिया।
➡️ 198 करोड़ का बजट, फिर भी शहर में अंधेरा!
➡️ मेयर का सीधा सवाल: पैसा है तो टूटी सड़कें क्यों?
➡️ 15 दिसंबर तक हर वार्ड में 1 करोड़ का काम शुरू
➡️ हाईमास्ट लाइट न लगने पर मेयर का पारा हाई
➡️ फाइल 24 घंटे से ज्यादा रोकने पर बाबुओं की खैर नहीं
➡️ जमीनी काम नहीं दिखा तो सख्त कार्रवाई पक्की
पैसा भरा है तो शहर में अंधेरा और टूटी सड़कें क्यों? उमेश गौतम
जन माध्यम
बरेली। नगर निगम की बजट बैठक शनिवार को जैसे ही शुरू हुई, माहौल गरमाने लगा। साढ़े 198 करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड महाबजट पेश किया गया, लेकिन इसके बाद मेयर डॉ. उमेश गौतम का सख्त रुख पूरी बैठक पर हावी रहा। उन्होंने साफ कहा जब खजाना भरा है, तो शहर बदहाल क्यों दिख रहा है? मेयर ने अधिकारियों पर सीधा सवाल दागते हुए कहा कि वार्डों में न सड़कें सुधर रहीं, न लाइटें लग रहीं और न ही विकास कार्यों की रफ्तार दिखाई दे रही है। उन्होंने दो टूक निर्देश दिया कि 15 दिसंबर तक हर वार्ड में कम से कम एक करोड़ रुपये के कार्य शुरू हो जाने चाहिए, वरना ढिलाई करने वाले विभागों पर कार्रवाई तय है।
जैसे ही हाईमास्ट लाइटों का मुद्दा उठा, मेयर का पारा और चढ़ गया। उन्होंने कहा कि दिवाली से पहले हर वार्ड में हाईमास्ट लगाने के निर्देश दिए गए थे, पर धरातल पर कुछ नहीं दिखता। मेयर ने अधिकारियों से पूछा दिवाली बीत गई, बताओ कहां लगी लाइटें? एक-जगह एक भी नहीं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब हर वार्ड में 100 नई लाइटें लगेंगी, और किसी भी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
फाइलों के बेवजह अटकने पर भी मेयर ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा मेरा और आयुक्त का ऑफिस आमने-सामने है, फिर फाइल 9 दिन किसकी मेज पर सोती रही? उन्होंने चेतावनी दी कि कोई भी बाबू 24 घंटे से ज्यादा फाइल रोकेगा तो कार्रवाई तय है। मेयर ने साफ कहा कि 15 दिनों में जमीनी काम दिखना चाहिए, सिर्फ कागजी प्रगति नहीं।मेयर ने अधिकारियों को चेताया कि जनता सब समझती है। बड़ा बजट तभी सार्थक है, जब शहर की गलियों, सड़कों और वार्डों में बदलाव नजर आए। बैठक भले बजट पर थी, पर मेयर के तेवरों ने इसे जवाबदेही की बैठक बना दिया। अब नज़रें इस पर हैं कि मेयर की चेतावनी का ज़मीन पर कितना असर दिखता है।