सेवा का सम्मान, वर्दी का अभिमान

बरेली SSP अनुराग आर्य ने सेवा और समर्पण के लिए 10 चौकी प्रभारियों को 500-1500 रुपये नकद देकर सम्मानित किया, पुलिसकर्मी भावुक।

सेवा का सम्मान, वर्दी का अभिमान
HIGHLIGHTS:

➡️ SSP अनुराग आर्य ने 10 चौकी प्रभारियों को नकद सम्मान
➡️ विनय बहादुर, राहुल कुमार, रोहित तोमर को ₹1500-1500
➡️ कुशलपाल, जावेद, सुधीर को ₹1000-1000
➡️ अखिलेश, अनूप, मोहित, जितेंद्र को ₹500-500
➡️ सेवा-समर्पण-त्याग को मिला भावुक सम्मान
➡️ पुलिसकर्मियों की आंखें चमकीं, नया जोश जागा

एसएसपी अनुराग आर्य ने 10 जांबाज़ चौकी प्रभारियों को किया सम्मानित 

जन माध्यम 
बरेली।
सेवा सिर्फ एक कर्तव्य नहीं होती,कभी कभी वह एक ऐसा अटूट विश्वास बन जाती है जिसे निभाने के लिए पुलिसकर्मी अपनी रातों की नींद, त्योहारों की खुशियाँ और परिवार का समय भी कुर्बान कर देते हैं। मंगलवार को कुछ ऐसा ही भावुक क्षण दिखा, जब एसएसपी अनुराग आर्य ने जिले के 10 समर्पित चौकी प्रभारियों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। यह सिर्फ पुरस्कार नहीं था यह उन अनदेखे पलों की सराहना थी, जिनमें इन अधिकारियों ने जनता की सुरक्षा को अपने जीवन से ऊपर रखा। सैटेलाइट चौकी प्रभारी विनय बहादुर सिंह, मलूकपुर के राहुल कुमार और नकटिया चौकी के रोहित तोमर को 1500-1500 रुपये का सम्मान मिला। जगतपुर के कुशलपाल सिंह, काकरटोला के जावेद अख्तर और दुनका चौकी प्रभारी सुधीर कुमार को 1000-1000 रुपये प्रदान किए गए। वहीं श्यामतगंज के अखिलेश उपाध्याय, फतेहगंज पश्चिमी के अनूप सिंह, बैरियर-2 के मोहित कुमार और माण्डल टाउन के जितेन्द्र कुमार को 500-500 रुपये देकर सम्मानित किया गया।पुरस्कार राशि भले छोटी हो, लेकिन उसके पीछे छिपी भावना बेहद बड़ी और दिल को छू लेने वाली थी। इन पुलिसकर्मियों की आँखों में चमक साफ बता रही थी कि उनका कठिन परिश्रम किसी की नजरों से ओझल नहीं रहा। कई तो ऐसे हैं जिन्होंने रातभर की ड्यूटी में भूख-प्यास तक भूलकर जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। समारोह में एसएसपी अनुराग आर्य ने भावुक शब्दों में कहा यह सम्मान सिर्फ व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उस भावना का सम्मान है जो जनता की सेवा को सर्वोपरि मानती है। आप सब आम लोगों की उम्मीदों का पहला सहारा हो।उनकी बातों ने पूरा माहौल एक अद्भुत ऊर्जा से भर दिया। यह सम्मान सिर्फ मेडल या पुरस्कार नहीं, बल्कि उन पुलिसकर्मियों के दिलों में नया जोश और नई जिम्मेदारी भरने वाली पहचान बन गया। जब नेतृत्व संवेदनशील हो, तो ड्यूटी केवल काम नहीं रहती वह एक सेवा, एक मिशन और एक वादा बन जाती है। पुलिस का यह सम्मान समारोह उसी वादे की गूंज था जनता की सुरक्षा, सबसे पहले।