एवान-ए-फ़रहत पर इंसाफ़ की बरसात
हाईकोर्ट ने एवान-ए-फ़रहत पर बीडीए की बुलडोज़र कार्रवाई रोकते हुए कहा—पहले सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया, तब तक यथास्थिति बनी रहे।
➡️ हाईकोर्ट ने 6 हफ्ते तक पूरी कार्रवाई पर रोक लगाई
➡️ कहा—पहले पूरी सुनवाई, फिर किसी फैसले पर पहुँचे
➡️ 2011 का आदेश मौजूद नहीं, कोर्ट ने गंभीर माना
➡️ संचालक 15 दिन में कंपाउंडिंग आवेदन देंगे
➡️ बीडीए 6 सप्ताह में निस्तारण करेगा, यथास्थिति बरकरार
हाईकोर्ट ने थामी बुलडोज़र की रफ्तार कहा, कानून से बढ़कर जल्दबाज़ी नहीं
डेस्क/ जन माध्यम
बरेली। शहर के सूफीटोला मोहल्ले में स्थित एवान-ए-फ़रहत एक बरातघर ही नहीं, सरफराज वली खां के कई परिवारों की यादों और खुशियों का गवाह। इसी जगह पर बीते दिनों चला बीडीए का बुलडोज़र मानो उन दीवारों पर नहीं, सरफराज वली खां के दिल पर चल था। लेकिन गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले ने इस टूटती सांसों वाले भवन में फिर से उम्मीद का उजाला लौटा दिया। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा डेढ़ माह तक कोई कार्रवाई नहीं,और याचिकाकर्ता को पूरा अवसर दिया जाएगा कि वह कानूनी प्रक्रिया में अपना पक्ष रख सके। यह फैसला केवल एक भवन के बचने का नहीं, बल्कि उस न्याय की आवाज़ का है जो कभी देर से सही, मगर मजबूत होकर लौटती है। बरातघर संचालक सरफराज वली खां की ओर से दायर याचिका में यह दर्द साफ झलकता है कि बीडीए नतीजा सुनाने से पहले बात करने को भी तैयार नहीं था। न कोई ठोस नोटिस, न ध्वस्तीकरण आदेश की प्रति और अचानक भारी पुलिस बल के साथ बुलडोज़र।
याचिकाकर्ता का कहना था कि जिस 2011 के आदेश का हवाला देकर पूरा ढांचा तोड़ने की तैयारी थी, वह आदेश कभी दिखाया ही नहीं गया न उन्हें, न कोर्ट को। कानून की निगाह में यह लापरवाही हल्की नहीं, बल्कि बेहद गंभीर थी और हाईकोर्ट ने इस बात को स्पष्ट रूप से माना।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि बरातघर संचालक को नियमन और कंपाउंडिंग का वास्तविक अवसर मिलना चाहिए।
बरातघर मालिक 15 दिन के भीतर कंपाउंडिंग का आवेदन देंगे।
बीडीए 6 सप्ताह में आवेदन का निस्तारण करेगा। इस दौरान जैसी स्थिति है, वैसी ही बनी रहेगी, और किसी भी तरह की बुलडोज़र कार्रवाई पर पूर्ण रोक रहेगी।
यह आदेश केवल कानून की भाषा में नहीं बोला गया, बल्कि इंसाफ़ की गर्माहट के साथ आया जो लोगों के टूटते मन को सहलाता है। अधिवक्ता वैभव माथुर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। और सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि जिस दस्तावेज़ पर बीडीए कार्रवाई कर रहा था, वह वास्तविकता में मौजूद ही नहीं था। अदालत ने भी इस चूक को गंभीर मानते हुए राहत दी।
बीडीए के संयुक्त सचिव दीपक कुमार का कहना था कि बरातघर बिना स्वीकृत नक्शे के चल रहा था और कई बार नोटिस जारी किए गए, जिनका जवाब नहीं दिया गया। लेकिन अब उन्हें भी हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। सरफराज वली खां ने कहा फैसले से मिली राहत एवान-ए-फ़रहत में फिर लौटी रौनक की उम्मीद हाईकोर्ट का यह फैसला मेरे परिवारों के लिए राहत है जो बरातघर के टूटने से परेशान थे। इस आदेश ने यह संदेश भी दिया कि कानून का डंडा भले सख्त हो, लेकिन न्याय का दिल हमेशा संवेदनशील होता है एवान-ए-फरहत अभी बचा है, और उम्मीदें भी।
दीवारें अभी खड़ी हैं और मेरे परिवार की दुआएँ भी: सरफराज वली खां।