1101 हनुमान विग्रह प्राण-प्रतिष्ठा का संकल्प

शिक्षक नीलकमल पाठक ने 1101 श्री हनुमान जी विग्रह प्राण-प्रतिष्ठा का संकल्प लिया है। अब तक यूपी, उत्तराखंड और राजस्थान में 118 प्रतिमाओं की स्थापना हो चुकी है।

1101 हनुमान विग्रह प्राण-प्रतिष्ठा का संकल्प
HIGHLIGHTS:

➡️ 1101 हनुमान विग्रह प्राण-प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक संकल्प
➡️ शिक्षक नीलकमल पाठक बने मुख्य सेवक
➡️ वर्ष 2018 से शुरू हुई आस्था की यात्रा
➡️ अब तक 118 हनुमान प्रतिमाओं की स्थापना
➡️ 1 जनवरी 2026 को बदायूं के बरखन में 118वीं प्रतिष्ठा

सरफराज़ खान/ जन माध्यम

सेंथल, बरेली। आस्था, संकल्प और सेवा भाव जब एक साथ जुड़ते हैं, तो वह केवल व्यक्तिगत साधना नहीं रहती, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा बन जाती है। “राम न मिलेंगे हनुमान के बिना” भजन से प्रेरित होकर 1101 श्री हनुमान जी महाराज की विग्रह प्राण-प्रतिष्ठा का संकल्प लेने वाले शिक्षक नीलकमल पाठक इसी भावना का सशक्त उदाहरण हैं। मूल रूप से जनपद बदायूं के ग्राम दुगरैय निवासी और वर्तमान में बदायूं रोड करगैना में रहने वाले नीलकमल पाठक राजेन्द्र नगर, बरेली में कोचिंग संचालित करते हैं।

नीलकमल पाठक ने यह संकल्प वर्ष 2018 में लिया था। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह यात्रा इतनी दूर तक पहुंचेगी, लेकिन आस्था और निरंतर प्रयास के बल पर अब तक 118 श्री हनुमान जी की प्रतिमाओं की विधि-विधान से प्राण-प्रतिष्ठा कराई जा चुकी है। हाल ही में 1 जनवरी 2026 को ग्राम बरखन, बदायूं में 118वीं स्थापना संपन्न हुई।

नीलकमल पाठक ने बताया कि इस संकल्प की शुरुआत आसान नहीं थी। सबसे बड़ी चुनौती थी—प्रतिमा स्थापना के लिए मंदिर या उपयुक्त स्थान की तलाश। पहली स्थापना के बाद लक्ष्य को लेकर कई सवाल और शंकाएं सामने आईं, लेकिन विश्वास डगमगाया नहीं। वर्ष 2018 में 3, 2019 में 6, 2021 में 9, 2022 में 12, 2023 में 15, 2024 में 18 और 2025 में 21 हनुमान विग्रहों की स्थापना के साथ यह यात्रा लगातार आगे बढ़ती रही।

उन्होंने बताया कि अब तक उनके संकल्प के अंतर्गत उत्तर प्रदेश के 8 जिलों, उत्तराखंड के 2 जिलों और राजस्थान के 2 जिलों में श्री हनुमान जी के दो फुट ऊंचे सिंदूरी विग्रहों की स्थापना हो चुकी है। सेंथल क्षेत्र के नजदीकी ग्राम हाफिजगंज के पंचायती मंदिर में भी 55वें क्रमांक की हनुमान जी महाराज की प्रतिमा स्थापित की जा चुकी है।

नीलकमल पाठक के इस सेवा पथ में उनके परिवार की भूमिका भी प्रेरणादायी रही है। उनके पिता सुभाष चंद्र पाठक, जो उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत हैं, स्वयं भी दो भव्य हनुमान मंदिरों का निर्माण करवा चुके हैं और अपने जीवन को धार्मिक सेवा से सार्थक बना रहे हैं।

1101 हनुमान स्थापना संकल्प के मुख्य सेवक नीलकमल पाठक का कहना है कि अभी 983 प्रतिष्ठाएं शेष हैं, जिन्हें वे अपने जीवनकाल में पूर्ण करने के लिए संकल्पबद्ध हैं। उन्होंने बताया कि देश-विदेश के किसी भी राज्य, शहर या गांव के मंदिर एवं देवालय में यदि कोई श्रद्धालु श्री हनुमान जी के दो फुट के सिंदूरी विग्रह की स्थापना कराना चाहता है, तो उनसे संपर्क कर सकता है।

नीलकमल पाठक का यह संकल्प न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि सच्ची श्रद्धा और निरंतर प्रयास से असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी पूरे किए जा सकते हैं।