दवा माफिया पर FSDA की करारी चोट! नकली-नशीली कफ सिरप की काली कमाई पर लाल झंडी
बरेली में FSDA ने नकली-नशीली कोडीन कफ सिरप के गोरखधंधे पर छापा मारा। गली नवाबान और मॉडल टाउन की तीन फर्मों से 45 हजार की दवाई जब्त, सैंपल लैब भेजे गए।
➡️ FSDA ने गली नवाबान और मॉडल टाउन में तीन बड़ी दवा फर्मों पर एक साथ छापा मारा
➡️ करीब 45 हजार रुपये की नशीली कोडीन युक्त कफ सिरप की बिक्री रोकी
➡️ एक्सट्रीम हेल्थ सॉल्यूशन और पवन फार्मास्यूटिकल्स (दो जगह) पर शिकंजा
➡️ 5 संदिग्ध दवाओं के सैंपल सील कर वाराणसी लैब भेजे गए
➡️ फर्मों से पिछले 2 साल का पूरा क्रय-विक्रय रिकॉर्ड तलब
➡️ औषधि निरीक्षक राजेश कुमार बोले: लैब रिपोर्ट आते ही कड़ी कार्रवाई पक्की
➡️ लखनऊ मुख्यालय के सख्त निर्देश पर हुई कार्रवाई, और फर्मों पर गाज गिरने की तैयारी
हसीन दानिश/ जन माध्यम
बरेली। शहर के दवा बाजार में लंबे समय से चल रहे नकली, मिलावटी और नशीली कोडीन युक्त कफ सिरप के गोरखधंधे पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने शुक्रवार को तगड़ा ब्रेक लगा दिया। गली नवाबान और मॉडल टाउन में एक साथ तीन बड़ी दवा एजेंसियों पर छापेमारी कर टीम ने करीब 45 हजार रुपये की नारकोटिक व कोडीन मिश्रित कफ सिरप की बिक्री तत्काल रोक दी। पांच संदिग्ध ऐलोपैथिक दवाओं के सैंपल सील कर वाराणसी की राजकीय लैब भेजे गए हैं।अचानक पड़ी इन छापों से दवा माफिया के होश उड़ गए। जिन तीन फर्मों पर शिकंजा कसा गया उनमें मैसर्स एक्सट्रीम हेल्थ सॉल्यूशन, मैसर्स पवन फार्मास्यूटिकल्स (गली नवाबान) और पवन फार्मास्यूटिकल्स (मॉडल टाउन) शामिल हैं। फर्म मालिकों की मौजूदगी में लाइसेंस, स्टॉक, खरीद-बिक्री के बिल और खासकर नशीली कफ सिरप की बिक्री का एक-एक पन्ना खंगाला गया। औषधि निरीक्षक राजेश कुमार ने साफ कहा, “इन तीनों फर्मों से पिछले दो साल का क्रय-विक्रय का पूरा रिकॉर्ड तलब किया गया है। लैब रिपोर्ट आते ही जो भी दोषी होगा, उसकी शामत आना तय है।” सहायक आयुक्त (औषधि) को पूरी रिपोर्ट भेजी जा रही है। जल्द ही और फर्मों पर गाज गिर सकती है।बाजार के जानकारों का कहना है कि गली नवाबान और मॉडल टाउन इलाके में लंबे समय से मिलावटी, एक्सपायरी और बिना बिल की नशीली कफ सिरप की सप्लाई चल रही थी। नशे के आदी युवाओं तक ये सिरप आसानी से पहुंच रहा था। लखनऊ मुख्यालय के सख्त निर्देश पर हुई इस कार्रवाई ने दवा माफिया के हौसले पस्त कर दिए हैं। पूरे शहर के मेडिकल स्टोर संचालक अब सहमे हुए हैं कि कहीं उनकी दुकान पर भी बुलडोजर न चल जाए।जन माध्यम की नजर अब इस बात पर है कि लैब रिपोर्ट आने के बाद FSDA कितनी सख्ती दिखाती है। अगर दोषी पाए गए तो लाइसेंस रद्द से लेकर भारी जुर्माना और जेल तक की कार्रवाई तय है।नशीली दवाओं के इस काले कारोबार को जड़ से खत्म करने का वक्त आ गया है। बरेली की जनता अब प्रशासन से उम्मीद कर रही है कि दवा माफिया पर यह चोट रुकनी नहीं चाहिए।