अंतर्राष्ट्रीय शायर प्रोफेसर वसीम बरेलवी भारत शिक्षा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड सम्मानित 

अंतर्राष्ट्रीय शायर प्रोफेसर वसीम बरेलवी भारत शिक्षा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड सम्मानित 
HIGHLIGHTS:

1.भारत शिक्षा शिखर सम्मेलन 2025 में मिला पुरुस्कार, बोले- उर्दू: तहज़ीब, मोहब्बत और एकता की ज़ुबान
2. साहित्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति, संवेदना और एकता को किया सशक्त

Bareilly News: भारत शिक्षा शिखर सम्मेलन 2025 के भव्य आयोजन में प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय शायर प्रोफेसर वसीम बरेलवी को “भारत शिक्षा सम्मान – लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें उर्दू साहित्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति, मानवीय संवेदना और सामाजिक एकता को सशक्त बनाने में उनके अद्वितीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। प्रोफेसर वसीम बरेलवी ने अपने साहित्यिक जीवन में अनेक प्रभावशाली ग़ज़लें और शेर रचे, जिनमें इंसानियत, प्रेम, न्याय और सांस्कृतिक समरसता का गहरा संदेश समाहित है। उनकी रचनाएं केवल उर्दू पाठकों तक सीमित नहीं, बल्कि हिंदी और अन्य भाषाओं के पाठकों द्वारा भी सराही जाती हैं। जगजीत सिंह जैसे प्रख्यात गायकों द्वारा उनकी ग़ज़लों को स्वरबद्ध किया गया है, जिससे उनकी लोकप्रियता जन-जन तक पहुँची।

उर्दू: तहज़ीब, मोहब्बत और एकता की ज़ुबान

इस विशेष अवसर पर वसीम बरेलवी ने कहा कि “उर्दू सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि मोहब्बत, तहज़ीब और एकता की आवाज़ है। मेरा प्रयास हमेशा यही रहा है कि शब्दों के ज़रिए दिलों को जोड़ा जाए, और साहित्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा दिया जाए।” उनकी यह भावना उनके समग्र काव्य संसार में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उनकी शायरी में सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और भारतीय जीवन मूल्यों की झलक मिलती है, जो आज के विभाजित होते समाज में एक रचनात्मक पुल का कार्य करती है।

बालाजी फाउंडेशन ने किया भव्य आयोजन 

सम्मान समारोह का आयोजन बालाजी फाउंडेशन और एक न्यूज़ के संयुक्त प्रयास से दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित किया गया था।इस अवसर पर देशभर से शिक्षाविद, साहित्यकार, कलाकार, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा प्रतिनिधि उपस्थित रहे। आयोजन का उद्देश्य उन व्यक्तित्वों को सम्मानित करना था जिन्होंने शिक्षा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में प्रेरणादायी कार्य किए हैं।

कौन हैं प्रोफेसर वसीम बरेलवी

डॉ. ज़ाहिद हुसैन (प्रो. वसीम बरेलवी) का जन्म 8 फरवरी 1940 को बरेली, उत्तर प्रदेश में हुआ था। राष्ट्रीय उर्दू भाषा प्रोत्साहन परिषद के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य भी रहे थे। वह सामाजिक समरसता और भारतीय संस्कृति को साहित्य के माध्यम से सशक्त करने वाले एक सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनको फिराक़ गोरखपुरी अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार, कालिदास स्वर्ण पदक, नसीम-ए-उर्दू पुरस्कार सहित अनेकों राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय पुरुस्कार मिले हैं। प्रोफेसर बरेलवी को मिला यह सम्मान केवल उनके व्यक्तित्व की मान्यता नहीं, बल्कि यह उस सोच का उत्सव है जो भाषा को विभाजन का नहीं, बल्कि मिलन का माध्यम मानती है। उनकी शायरी वर्तमान समय में भी प्रासंगिक है और युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रही है।