जब अफसर हौसला बन जाए

एडीजी रमित शर्मा, बरेली जोन, यूपी पुलिस क्रिकेट, पुलिस नेतृत्व, ऐतिहासिक जीत

जब अफसर हौसला बन जाए
HIGHLIGHTS:

➡️ 26वीं यूपी पुलिस वार्षिक क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन
➡️ एडीजी रमित शर्मा का प्रेरक और संवेदनशील नेतृत्व
➡️ फाइनल में मेरठ जोन को हराकर बरेली जोन की जीत
➡️ जीत के पीछे भरोसा, अनुशासन और टीम भावना
➡️ ट्रॉफी के साथ दिलों में सम्मान की जीत

एडीजी रमित शर्मा ने हौसला दिया, तो टीम में इतिहास लिख दिया 

डेस्क/ जन माध्यम 
बरेली। कुछ जीतें ट्रॉफी तक सीमित रहती हैं,और कुछ जीतें दिलों में उतर जाती हैं। 9 से 12 दिसंबर के बीच पुलिस कमिश्नरेट कानपुर में आयोजित 26वीं उत्तर प्रदेश पुलिस वार्षिक क्रिकेट प्रतियोगिता ऐसी ही एक जीत की गवाह बनी जहां मैदान पर बल्ला गेंद नहीं, विश्वास, अनुशासन और इंसानियत खेल रही थी। इस जीत के पीछे जो साया बनकर खड़ा रहा, वह था एडीजी रमित शर्मा का संवेदनशील और प्रेरक नेतृत्व। प्रदेश के 12 जोनों की टीमों ने जब ग्रीन पार्क स्टेडियम, 37वीं वाहिनी पीएसी और डीएवी कॉलेज ग्राउंड पर कदम रखा, तो हर खिलाड़ी अपने साथ सिर्फ किट नहीं, अपने ज़िम्मेदार अफसर होने का स्वाभिमान भी लाया। 11 मुकाबलों में पसीना बहा, जज़्बा टूटा जुड़ा, लेकिन मैदान पर कभी अनुशासन नहीं टूटा क्योंकि ऊपर से नीचे तक भरोसे की डोर मजबूत थी।
फाइनल में मेरठ जोन के 166 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए जब बरेली जोन ने 18.5 ओवर में 172 रन बनाकर जीत दर्ज की, तो यह महज़ एक स्कोर नहीं था। यह उस विश्वास की जीत थी, जो एडीजी रमित शर्मा ने अपने जवानों में बोया। वे जानते हैं कि थका हुआ शरीर तभी दौड़ता है, जब दिल में हौसला हो और हौसला वहीं से मिलता है, जहां नेतृत्व इंसान बनकर साथ खड़ा हो। रमित शर्मा के शब्द आदेश नहीं, हिम्मत देते हैं। उनका मार्गदर्शन खिलाड़ियों के लिए सुरक्षा कवच बना जहां गलती पर डांट नहीं, सीख मिली; जहां जीत पर घमंड नहीं, विनम्रता सिखाई गई। अवनीश चपराना की बल्लेबाज़ी, कमल चंदेल की धारदार गेंदबाज़ी, विकास राघव की फुर्ती और कोच वाहिद अली की रणनीति इन सबके पीछे वह भरोसा था, जो एक सच्चा लीडर देता है। ट्रॉफी हाथ में थी, लेकिन आंखों में चमक कुछ और कह रही थी यह जीत सम्मान की थी, आत्मबल की थी।  यह जीत इतिहास बने या न बने, लेकिन दिलों में हमेशा रहेगी क्योंकि इसे दिल से जिया गया था।