सरधना में दो सनसनीखेज़ वारदातें, ज्वालागढ़ में युवक की जिंदा जलाकर हत्या
मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र में लगातार दो गंभीर वारदातें, ज्वालागढ़ में कश्यप युवक की जिंदा जलाकर हत्या से इलाके में दहशत।
➡️ सरधना थाना क्षेत्र में लगातार दो बड़ी आपराधिक घटनाएं
➡️ ज्वालागढ़ गांव में कश्यप युवक की जिंदा जलाकर हत्या
➡️ कपसाड़ हत्याकांड के बाद दूसरी सनसनीखेज़ वारदात
➡️ एक नाबालिग आरोपी गिरफ्तार, अन्य की तलाश जारी
हशमे आलम/ जन माध्यम
मेरठ। सरधना थाना क्षेत्र बीते कुछ दिनों से गंभीर आपराधिक घटनाओं को लेकर चर्चा में है। पहले कपसाड़ गांव में दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी के अपहरण की सनसनीखेज़ वारदात सामने आई, जिसे पुलिस ने सुलझाने का दावा किया। अब उसी थाना क्षेत्र के ज्वालागढ़ गांव में कश्यप समाज के युवक की जिंदा जलाकर हत्या का मामला सामने आया है, जिसने क्षेत्र में एक बार फिर भय और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।
कपसाड़ गांव में 8 जनवरी 2026 को उस समय हड़कंप मच गया था, जब खेत जा रही दलित महिला सुनीता जाटव की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गई और उसकी 20 वर्षीय बेटी रूबी का अपहरण कर लिया गया। घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बन गई थी। पुलिस ने कई टीमों का गठन कर आरोपी पारस सोम को गिरफ्तार किया और अपहृत युवती को सकुशल बरामद किया। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई के बाद हालात धीरे-धीरे सामान्य हुए।
हालांकि इस घटना के कुछ ही दिन बाद, 5 जनवरी 2026 को ज्वालागढ़ गांव में हुई दूसरी वारदात ने फिर से सरधना को सुर्खियों में ला दिया। मोरादाबाद से अपनी मौसी के घर जा रहे रानू कश्यप उर्फ सोनू की निर्मम हत्या कर दी गई। आरोप है कि उसे पहले शराब पिलाई गई, फिर नकदी लूटी गई और बाद में जिंदा जला दिया गया। रानू अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था, जिससे परिवार गहरे सदमे में है।
सूचना मिलने पर सरधना थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और मामले में मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने एक नाबालिग आरोपी को गिरफ्तार करने की पुष्टि की है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी बताई जा रही है। क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।
लोगों की मांग है कि ज्वालागढ़ मामले में भी कपसाड़ की तरह सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी हो और पीड़ित परिवार को न्याय मिले।
सरधना थाना क्षेत्र में कम समय के भीतर हुई ये दोनों गंभीर घटनाएं प्रशासन के लिए चुनौती बनकर सामने आई हैं। एक ओर जहां कपसाड़ मामले में पुलिस की सक्रियता दिखी, वहीं ज्वालागढ़ हत्याकांड में जांच की दिशा और गति पर लोगों की निगाहें टिकी हैं। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि ग्रामीण इलाकों में अपराध रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है।