मेरठ: सूअर पालन पर गुर्जर बिरादरी का विरोध, दलित युवक पर हमला; परिवार दहशत में, घर पर चिपकाए 'पलायन' के पोस्टर
मेरठ के परीक्षितगढ़ में दलित युवक पर सूअर पालन का विरोध कर रहे गुर्जर बिरादरी के लोगों ने हमला किया। पुलिस कार्रवाई न होने पर पीड़ित ने घर पर ‘पलायन’ के पोस्टर चिपकाए। परिवार दहशत में, एसएसपी से कार्रवाई की मांग।
→ मेरठ में दलित युवक पर सूअर पालन को लेकर जानलेवा हमला
→ गुर्जर बिरादरी के लोगों पर धमकी और हमले का आरोप
→ पुलिस कार्रवाई न होने से पीड़ित ने लगाए ‘पलायन’ पोस्टर
→ परिवार भय में, गांव छोड़ने की चेतावनी
→ आजीविका छिनने और जातिगत भेदभाव का आरोप
→ थाने में शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं
→ एसएसपी से आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
→ स्थानीय स्तर पर तनाव, पुलिस जांच जारी
जन माध्यम
मेरठ। मेरठ के परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र में सूअर पालन करना एक दलित युवक के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। गुर्जर बिरादरी के कुछ लोगों द्वारा विरोध के बाद युवक पर जानलेवा हमला किया गया, जिससे उसका परिवार दहशत में है। पीड़ित ने पुलिस की उदासीनता का आरोप लगाते हुए घर के बाहर 'पलायन' के पोस्टर चिपका दिए हैं और एसएसपी से न्याय की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला
पीड़ित दलित युवक (नाम गोपनीय रखा गया) ने बताया कि वह अपने घर के बाहर सूअर पालकर परिवार का भरण-पोषण करता है। लेकिन गुर्जर बिरादरी के कुछ लोग इससे नाराज हैं और उन्होंने कई बार सूअर पालन बंद करने की धमकी दी। विरोध बढ़ने पर आरोपियों ने जान से मारने की नीयत से उस पर हमला कर दिया। मारपीट में युवक को चोटें आईं, लेकिन वह किसी तरह जान बचाकर भागा।
युवक ने कहा, मैं गरीब हूं, यही कमाई का सहारा है। लेकिन बिरादरी के लोग इसे पसंद नहीं करते और बार-बार धमकाते हैं। हमले के बाद परिवार डर के साए में जी रहा है।
पुलिस पर उदासीनता का आरोप
पीड़ित के अनुसार, उसने घटना की शिकायत थाने में की, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे हताश होकर उसने घर के बाहर बड़े-बड़े पोस्टर चिपका दिए, जिन पर 'पलायन' लिखा है। पोस्टर में लिखा है कि न्याय न मिलने पर परिवार गांव छोड़ने को मजबूर होगा।
एसएसपी से की मांग
युवक ने मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उसने कहा, अगर न्याय नहीं मिला तो हमें गांव छोड़ना पड़ेगा। हम दलित हैं, लेकिन जीने का हक तो है।
परीक्षितगढ़ थाने के प्रभारी ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन अभी तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। स्थानीय लोग बिरादरी के बीच तनाव की बात स्वीकार कर रहे हैं, लेकिन कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
यह मामला जातिगत भेदभाव और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के मुद्दों को उजागर करता है। पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। मामले की आगे की जांच जारी है।